हरियाणा के करनाल जिले के गांव नलवी खुर्द निवासी रोशन लाल पुत्र स्वर्गीय सूरत सिंह की पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही, डॉक्टरों और स्टाफ के दुर्व्यवहार तथा समय पर उपचार नहीं मिलने के आरोप लगाए हैं। मृतक के भाई ने पूरे मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार रोशन लाल की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 25 मई 2026 को करनाल स्थित कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। वहां हार्ट विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण चिकित्सकों ने उन्हें उसी दिन पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। परिजनों का कहना है कि 26 मई 2026 को दोपहर करीब दो बजे रोशन लाल को पीजीआई चंडीगढ़ के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कर लिया गया। रात में हार्ट विशेषज्ञ डॉक्टर ने मरीज को देखकर इलाज शुरू किया, जिससे परिवार को उम्मीद थी कि उनकी हालत में सुधार होगा।
परिजनों का आरोप है कि अगले दिन सुबह करीब नौ बजे के बाद रोशन लाल की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, लेकिन इसके बावजूद हार्ट विभाग का कोई डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आया। उन्होंने बताया कि कई बार अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ से मरीज की बिगड़ती हालत की जानकारी दी गई, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि यह उनका काम नहीं है और हार्ट विभाग के डॉक्टर ही मरीज को देखेंगे। जब परिजनों ने हार्ट विशेषज्ञ का नंबर या उनके बारे में जानकारी मांगी तो किसी ने कोई सहायता नहीं की।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि डॉक्टर ने मरीज को दिन में चार बार भाप देने का निर्देश अपनी पर्ची में लिखा था, लेकिन पूरे दिन एक बार भी भाप नहीं दी गई। जब परिजनों ने इस बारे में डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कहा कि यह कार्य एसजी करेगा, जबकि संबंधित कर्मचारी ने भी यह कहकर मना कर दिया कि यह उसका काम नहीं है। परिजनों का आरोप है कि इस लापरवाही के कारण मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और दोपहर बारह बजे के बाद उसकी बेचैनी लगातार बढ़ती रही।
मृतक के भाई का कहना है कि रात करीब नौ बजे रोशन लाल ने दम तोड़ दिया, लेकिन उनकी मृत्यु तक कोई हार्ट विशेषज्ञ डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि उत्तर भारत के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में गिने जाने वाले पीजीआई चंडीगढ़ की इमरजेंसी में उन्हें अत्यंत खराब व्यवस्था और असंवेदनशील व्यवहार का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि मरीज की जान बचाने के लिए समय रहते आवश्यक उपचार नहीं किया गया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि रोशन लाल की मृत्यु के बाद भी डॉक्टरों का व्यवहार बेहद अपमानजनक रहा। उनका कहना है कि उन्हें अस्पताल के एक हॉल में बुलाकर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया। जब उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार किया तो उन पर लगातार दबाव डाला गया। इसके बाद उन्होंने घटना की सूचना डायल 112 पर दी और मौके पर पहुंची पुलिस को अपना बयान दर्ज कराया।
शिकायत के अनुसार पुलिस को सूचना देने के बाद भी अस्पताल के कर्मचारियों ने दोबारा हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया। बाद में उन्होंने जांच लंबित रहने संबंधी विकल्प पर हस्ताक्षर किए और अस्पताल प्रशासन से स्पष्ट कहा कि यदि आवश्यक हो तो शव का पोस्टमार्टम कराया जा सकता है। आरोप है कि उसी रात करीब बारह बजे अस्पताल से फोन कर उन्हें फिर बुलाया गया और फोन करने वाले व्यक्ति ने उनसे अभद्र भाषा में बात करते हुए धमकाने का प्रयास किया।
मृतक रोशन लाल का निधन बुधवार 27 मई 2026 को हो गया। इस संबंध में पत्र क्रमांक आरओएनएलके 25/2605/24 तथा फाइल नंबर ईएमजीएमईडी 612917 के माध्यम से पीजीआई चंडीगढ़ के संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजी गई है।
परिजनों ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, इलाज में हुई कथित लापरवाही, समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध न कराने, मरीज की उचित देखभाल न करने, डॉक्टरों और स्टाफ के दुर्व्यवहार तथा मृत्यु के बाद दस्तावेजों पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराने के आरोपों की जांच की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
