30 C
Munich
Saturday, July 25, 2026

लखनऊ की जिस बिल्डिंग में 15 लोगों की गई जान, उसपर चला बुलडोजर; 15 दिन की दी गई थी नोटिस

Must read

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अलीगंज में उस बिल्डिंग पर बुलडोजर एक्शन लिया, जिसमें पिछले महीने 15 लोगों की आग लगने से मौत हो गई थी। एलडीए ने बिल्डर को 15 दिन की नोटिस दी थी, जिसके बाद यह एक्शन लिया गया है।
लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ में पिछले महीने आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में अब एलडीए ने जिस बिल्डिंग में आग लगी थी, उसको गिराने का काम शुरू कर दिया है। शनिवार सुबह भारी पुलिस बल तैनात किया गया और मौके पर बुलडोजर पहुंचे, जिसके बाद बिल्डिंग को गिराने की तैयारी शुरू कर दी गई। प्रशासन का कहना है कि बिल्डिंग मालिक को 15 दिन की नोटिस दी गई थी, लेकिन कार्रवाई न होने के बाद अब एक्शन लिया जा रहा है।

जांच के बाद शुरू किया एक्शन
अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) ने शनिवार को अलीगंज में आग से क्षतिग्रस्त बिल्डिंग को गिराने का काम शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई मालिक को दी गई 15 दिन की समय-सीमा खत्म होने के बाद की गई। समय-सीमा खत्म होने के कुछ ही देर बाद बुलडोज़र मौके पर पहुंच गए। इससे पहले अधिकारियों ने पहले यह जांचा कि इमारत के मालिक ने कितना हिस्सा पहले ही गिरा दिया है, और उसके बाद गिराने का काम शुरू हुआ।

भारी पुलिस बल तैनात
इस कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बता दें कि 22 जून को अलीगंज की इसी बिल्डिंग में भीषण आग लगी थी। इस दौरान यहां चल रहे एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में मौजूद 15 लोगों की मौत हो गई थी।
बिल्डर ने एक्शन को बताया गैर कानूनी
वहीं, बिल्डिंग के मालिक एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद शुक्ला ने इसे गिराने की कार्रवाई को “गैर-कानूनी” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने नोटिस में दी गई समय-सीमा खत्म होने से पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने कहा, “यह गैर-कानूनी कार्रवाई है। नोटिस में 25 जुलाई तक की समय-सीमा दी गई थी। नोटिस के मुताबिक, मैं कार्रवाई करने आया था, लेकिन अलीगंज पुलिस स्टेशन से मुझे इजाजत नहीं मिली। मुझे सिर्फ़ 20 जुलाई को इजाजत मिली थी। मैं 20 जुलाई से ही इस पर काम कर रहा था और आज भी काम चल रहा था। उनके नोटिस के हिसाब से मेरे पास 25 जुलाई की शाम तक का समय था।”

बिल्डिंग गिराने की कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए राजेंद्र प्रसाद शुक्ला ने आगे कहा, “यह कैसा न्याय है? यह लोकतंत्र है। वे अभी पूरी फ़ोर्स के साथ इसे गिराने आ गए हैं। अगर उन्हें मेरे द्वारा की गई कार्रवाई पर कोई आपत्ति थी, तो उन्हें 26 जुलाई को आना चाहिए था। वे समय से पहले क्यों आए? मुझे इस पर आपत्ति है

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Latest article