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Wednesday, August 12, 2026

सीमांकन में निजी जमीन के हिस्से पर वन विभाग की तार फेंसिंग मिलने का दावा, 0.486 हेक्टेयर कब्जे का उल्लेख; न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा परिवार

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सीहोर। आष्टा तहसील के ग्राम झिकड़ी मेवाती में भूमि सीमांकन को लेकर एक मामला सामने आया है, जिसमें राजस्व विभाग की सीमांकन रिपोर्ट में निजी भूमि के एक हिस्से पर वन विभाग की तार फेंसिंग और दूसरे हिस्से पर अन्य पक्ष का कब्जा पाए जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता दिनेश वर्मा का कहना है कि अपनी जमीन को लेकर वह लंबे समय से प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष आवेदन दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।

प्राप्त राजस्व दस्तावेजों के अनुसार दिनेश आ० दिलीप सिंह द्वारा ग्राम झिकड़ी मेवाती में स्थित सर्वे नंबर 168/2ख, रकबा 2.003 हेक्टेयर भूमि के सीमांकन के लिए नायब तहसीलदार आष्टा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इस पर 16 मई 2025 को नायब तहसीलदार की ओर से राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी को भूमि का सीमांकन कर सीमांकन प्रतिवेदन, पंचनामा और फील्डबुक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद संबंधित राजस्व अधिकारियों द्वारा मौके पर सीमांकन किए जाने का उल्लेख दस्तावेजों में है। सीमांकन प्रतिवेदन में कहा गया है कि आवेदक और पड़ोसी कृषकों की उपस्थिति में खसरा नंबर 168/2ख की भूमि का सीमांकन किया गया और उसकी चारों सीमाओं को नापकर निशान कायम किए गए तथा मौके पर सीमाएं समझाई गईं।

राजस्व विभाग की उपलब्ध रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि सीमांकित खसरा नंबर के 0.061 हेक्टेयर हिस्से पर आर्चबिशप भोपाल, डॉ. लियो कार्नेलियो आदि का कास्त के रूप में तथा 0.486 हेक्टेयर हिस्से पर वन विभाग द्वारा तार फेंसिंग किए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार सीमांकन के बाद मौके पर पंचनामा भी तैयार किया गया।

सीमांकन रिपोर्ट सामने आने के बाद शिकायतकर्ता का कहना है कि अब प्रशासन को दस्तावेजों में दर्ज स्थिति के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए। उनका आरोप है कि उनकी भूमि से संबंधित समस्या के समाधान के लिए वह लगातार अलग-अलग कार्यालयों में आवेदन दे रहे हैं और जनसुनवाई में भी अपनी शिकायत रख चुके हैं।

शिकायतकर्ता की ओर से कलेक्टर सीहोर के समक्ष भी आवेदन दिए जाने का उल्लेख उपलब्ध दस्तावेजों में मिलता है। आवेदन में वन विभाग से संबंधित हिस्से के कब्जे को हटवाने तथा भूमि का कब्जा दिलाए जाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मौके की स्थिति को लेकर उन्हें अभी तक राहत नहीं मिली है।

वहीं, वन विभाग की ओर से शिकायत के संबंध में अलग जवाब भी दिया गया है। उपलब्ध शिकायत निस्तारण विवरण में वन परिक्षेत्राधिकारी आष्टा एवं उप वनमंडलाधिकारी सीहोर की ओर से बताया गया है कि संबंधित क्षेत्र वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास है। जवाब में वन्यप्राणियों के खेतों में आने और फसलों को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में नियमानुसार मुआवजा लेने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई है।

वन विभाग की ओर से शिकायत को मांग आधारित बताते हुए उसे बंद करने की अनुशंसा किए जाने का भी उल्लेख शिकायत की स्थिति में है। हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि उनका मूल मुद्दा वन्यप्राणियों से नहीं, बल्कि अपनी भूमि से संबंधित है और वह भूमि पर कथित कब्जे तथा तार फेंसिंग के मामले में कार्रवाई चाहते हैं।

दिनेश वर्मा का कहना है कि उन्होंने सीमांकन से संबंधित दस्तावेज और अन्य आवेदन प्रशासन के सामने प्रस्तुत किए हैं। उनका आरोप है कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। परिवार का कहना है कि सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते-लगाते वे परेशान हो चुके हैं और अब चाहते हैं कि प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर समय रहते उन्हें न्याय दिलाए।

मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजस्व सीमांकन रिपोर्ट में दर्ज स्थिति के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है। क्या मौके पर दोबारा संयुक्त निरीक्षण कराया जाएगा, क्या राजस्व और वन विभाग संयुक्त रूप से भूमि की स्थिति स्पष्ट करेंगे और क्या सीमांकन में दर्ज 0.486 हेक्टेयर हिस्से को लेकर कोई अंतिम प्रशासनिक निर्णय लिया जाएगा, इस पर शिकायतकर्ता की नजर बनी हुई है।

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार सीमांकन और शिकायत निस्तारण से संबंधित अलग-अलग प्रक्रियाएं सामने आती हैं। इसलिए भूमि के स्वामित्व, कब्जे और वन विभाग की फेंसिंग से जुड़े अंतिम अधिकारों का निर्धारण संबंधित राजस्व एवं सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा रिकॉर्ड और मौके की जांच के आधार पर ही किया जा सकेगा।

पीड़ित परिवार की मांग है कि सभी दस्तावेजों और सीमांकन रिपोर्ट को आधार बनाकर मौके का दोबारा निरीक्षण कराया जाए, संबंधित विभागों की संयुक्त जांच हो और यदि किसी पक्ष द्वारा नियम विरुद्ध कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। परिवार का कहना है कि उसे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े विवाद का स्पष्ट और न्यायसंगत समाधान चाहिए।

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