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Thursday, August 20, 2026

कैंसर की नकली दवाओं के इंटरस्टेट सिंडिकेट का पर्दाफाश, करीब 9 करोड़ का सामान बरामद; गिरफ्तार किए गए 17 आरोपी

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कैंसर की नकली दवाओं और हॉस्पिटल में मरीजों के लिए उपलब्ध दवाओं को डायवर्ट करने वाले इंटरस्टेट सिंडिकेट का पर्दाफाश हो गया है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की छापेमारी में दवाएं और कैश भी बरामद हुआ है।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इंटरस्टेट सेल ने कैंसर की नकली और अवैध तरीके से डायवर्ट की गई महंगी दवाओं के सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में अब तक 17 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। आरोपियों के कब्जे और ठिकानों से एंटी-कैंसर दवाओं की भरी हुई 588 शीशियां बरामद की गई हैं। 6 खाली वायल और 7 खाली दवा के डिब्बे भी बरामद हुए हैं। इसके अलावा 3 हजार 21 यूनिट अन्य दवाएं भी रिकवर हुईं।
दिल्ली से मुंबई-हैदराबाद तक फैला है सिंडिकेट
बता दें कि बरामद दवाओं और अन्य सामान की कीमत करीब 9 करोड़ रुपये आंकी गई है। सिंडिकेट से जुड़े ठिकानों से करीब 50 लाख रुपये कैश भी बरामद हुआ है। जांच के दौरान, दिल्ली-NCR, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों तक फैली इंटरस्टेट सप्लाई चेन का भी खुलासा हुआ है।

रेड में बरामद हुईं कैंसर की महंगी दवाएं
बरामद हुई कैंसर की महंगी दवाओं में Darzalex, Imfinzi, Erbitux, Opdyta, Gazyva, Bavencio, Adcetris और Keytruda शामिल हैं। क्राइम ब्रांच को 22 जून 2026 को संगठित सिंडिकेट की सूचना मिली थी। जांच में ईस्ट दिल्ली, रोहिणी और मुंबई समेत कई संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई है।

क्राइम ब्रांच ने दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ की छापेमारी
बीते 11 जुलाई को क्राइम ब्रांच ने 7 टीमों का गठन कर दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ छापेमारी की थी। छापेमारी ड्रग्स डिपार्टमेंट और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर की गई। जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद धीरे-धीरे पूरी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ है। इसको लेकर FIR, 12 जुलाई 2026 को थाना क्राइम ब्रांच, दिल्ली में दर्ज की गई।

अस्पतालों से भी दवाइयां चोरी करवाता था सिंडिकेट
ये सिंडिकेट 3 मुख्य तरीकों से कैंसर की महंगी दवाएं हासिल करता था। ये लोग अनधिकृत स्रोतों से नकली दवाओं की खरीद करते थे। कैंसर मरीजों के लिए अस्पतालों में रखी दवाओं की हेराफेरी और चोरी करते थे। सरकारी संस्थानों और वेयरहाउस से सप्लाई की गई दवाओं को अवैध तरीके से डायवर्ट करना भी इनका काम था।

री-पैकेजिंग करके बेचते थे चोरी की दवाई
इन दवाओं की खरीद-बिक्री में वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड और ड्रग लाइसेंस का इस्तेमाल नहीं किया जाता था। दवाओं को घरों और अन्य ठिकानों पर स्टोर कर आगे अलग-अलग बिचौलियों के जरिए बाजार में भेजा जाता था। पुराने कार्टन और खाली डिब्बों का इस्तेमाल कर दवाओं की री-पैकेजिंग की जाती थी। बैच नंबर, MRP और पहचान से जुड़े निशान एसीटोन जैसे केमिकल से मिटाए जाते थे दवाओं की पैकिंग के लिए थर्माकोल बॉक्स, बबल रैप, टेप और पॉलीथिन का इस्तेमाल किया जाता था। लेन-देन और कैश का हिसाब रखने वाली डायरियां और रजिस्टर भी बरामद किए गए हैं।

इस मामले में 17 आरोपी गिरफ्तार
अभिषेक वैश्य- लक्ष्मी नगर, दिल्ली
शुभम कुमार चौधरी- लक्ष्मी नगर, दिल्ली
सूरज चौधरी- लक्ष्मी नगर, दिल्ली
गगन- इंदिरापुरम, गाजियाबाद
सतीश कुमार- गोविंदपुरी, दिल्ली
मुकेश- गुरुग्राम
आयुष कुमार- नवी मुंबई
विश्वास त्यागी- गाजियाबाद
परमजीत श्योराण- झज्जर, हरियाणा
आनंद कुमार- नोएडा
श्रीनिवासुलु कलवा- हैदराबाद
रामदास सतीश कुमार- हैदराबाद
मालुगरी श्रीनाथ रेड्डी- हैदराबाद
मयंक गर्ग- गुरुग्राम
दीपक उर्फ रवि- फरीदाबाद
जसवंत शर्मा- फरीदाबाद
मनीष शर्मा- अलवर, राजस्थान
अस्पतालों से भी की जा रही थी दवाओं की हेराफेरी
जांच में सामने आया कि कुछ आरोपी अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारी और मेडिकल स्टोर से जुड़े लोग थे। हैदराबाद में अस्पताल से मरीजों के लिए उपलब्ध कैंसर की दवाएं निकालकर सप्लाई करने का खुलासा हुआ है। फरीदाबाद में एक अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग से जुड़े नर्सिंग स्टाफ की भूमिका सामने आई है। एक आरोपी अस्पताल में नर्सिंग इंचार्ज के पद पर कार्यरत था। एक आरोपी ऑन्कोलॉजिस्ट का पर्सनल असिस्टेंट रह चुका था।

जांच के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ?
वहीं, अलवर में गिरफ्तार आरोपी ने अस्पताल से मरीजों के लिए रखे एंटी-कैंसर इंजेक्शन की हेराफेरी की। जांच के दौरान, अलग-अलग आरोपियों के ठिकानों से बड़ी संख्या में कैंसर इंजेक्शन बरामद किए गए।

588 भरी हुई एंटी-कैंसर दवाओं की वायल
6 खाली वायल
7 खाली दवा के डिब्बे
3 हजार 21 यूनिट अन्य दवाएं
करीब 50 लाख रुपये कैश
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
रजिस्टर और डायरियां
दवाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री
क्राइम ब्रांच की जांच अभी जारी
पुलिस अब सिंडिकेट के बाकी सदस्यों, दवाओं के असली स्रोत और पूरे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। दवाओं के अंतिम खरीदारों और लाभार्थियों की भी पहचान की जा रही है। पैसों के लेन-देन और वित्तीय नेटवर्क की जांच जारी है। जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां और बरामदगी होने की संभावना है। इससे पहले भी दिल्ली में फर्जी कैंसर ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था, जब ठग 100 रुपये की दवा 3 लाख में बेच रहे थे।

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