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Saturday, August 22, 2026

एक साल बाद जन्म पंजीयन के लिए परिवार भटक रहा, प्रशासनिक प्रक्रिया में फंसा मामला; मदद की गुहार

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राजस्थान में जन्म पंजीयन से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद एक परिवार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है। परिवार का आरोप है कि बच्चे के जन्म का समय पर पंजीयन नहीं हो सका और अब एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए शपथ पत्र, दस्तावेज और अधिकारियों के आदेश की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है। इसके बावजूद सुनवाई नहीं होने से परिवार परेशान है और प्रशासन से मदद की मांग कर रहा है।

परिवार की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, एक वर्ष से अधिक समय बाद जन्म की सूचना देने की स्थिति में जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) तथा राजस्थान जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2000 के नियम 9(3) के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त करने की प्रक्रिया बताई गई है। इसके लिए आवेदक को शपथ पत्र में बच्चे का नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान, माता-पिता का नाम, स्थायी और वर्तमान पता सहित अन्य आवश्यक विवरण देने होते हैं।

शपथ पत्र के प्रारूप में यह भी उल्लेख है कि बच्चे का जन्म अस्पताल के बजाय घर पर हुआ था और उक्त जन्म का पंजीयन इससे पहले किसी रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार कार्यालय में नहीं कराया गया है। साथ ही जन्म प्रमाण पत्र पहले जारी नहीं होने की घोषणा भी की जाती है। आवेदक द्वारा बच्चे तथा माता-पिता से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने और शपथ पत्र पर वर्तमान फोटो लगाने की बात भी निर्धारित प्रारूप में कही गई है।

दस्तावेजों में आगे यह प्रक्रिया बताई गई है कि आवेदन और संलग्न दस्तावेजों के आधार पर घटना की सत्यता का सत्यापन किया जाना है। इसके बाद संबंधित अधिकारी द्वारा स्थानीय रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु को जन्म का पंजीयन करने के लिए आदेश जारी किया जा सकता है। परिवार का कहना है कि कागजी प्रक्रिया और दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद संबंधित स्तर पर उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

परिजनों का आरोप है कि वे अपनी समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों में लगातार संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट समाधान नहीं मिल रहा। परिवार का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के अभाव में बच्चे से जुड़े कई सरकारी और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से वे चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर नियमानुसार जन्म पंजीयन की कार्रवाई पूरी कराएं।

परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि उनके दस्तावेजों की जांच कर यदि सभी तथ्य सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार जन्म पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया जाए। परिजनों का कहना है कि वे लंबे समय से परेशान हैं और अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

इस मामले में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आवेदन में कौन-कौन सी प्रक्रिया लंबित है और जन्म पंजीयन में देरी का वास्तविक कारण क्या है। परिवार ने उच्च अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर शीघ्र समाधान कराने की गुहार लगाई है।

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खाड़ी देशों से 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी डिपोर्ट, जानें पड़ोसियों ने किए थे कैसे-कैसे कांडखाड़ी देशों से मार्च से जुलाई के बीच 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया है। सऊदी अरब ने 15,500 और UAE ने 3,803 लोगों को वापस भेजा है। वापस भेजने के कारणों में सुरक्षा चिंताएं, वीजा उल्लंघन, अवैध प्रवेश, भीख मांगना, ड्रग अपराध और फर्जी दस्तावेज शामिल रहे। लाहौर: ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग के दौरान अब खाड़ी देशों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों पर सुरक्षा जांच और कार्रवाई बढ़ गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, हाल के महीनों में 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों को खाड़ी देशों से डिपोर्ट किया गया है। इनमें सबसे बड़ी संख्या सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी कि UAE से बाहर भेजे गए लोगों की है। बता दें कि पाकिस्तान इन दोनों ही देशों के साथ अपने अच्छे रिश्ते होने की बात कहता रहता है। हालांकि खाड़ी देशों ने इस मामले में एक तरह से पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने बेइज्जत किया है। पाकिस्तानियों ने किए थे कैसे-कैसे कांड? बता दें कि यह आंकड़ा पाकिस्तान के नारकोटिक्स कंट्रोल मंत्रालय की ओर से गुरुवार को नेशनल असेंबली में पेश किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ पाकिस्तानियों को अपने शहरों में हुए ईरानी हमलों से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री बनाने या सोशल मीडिया पर अपलोड करने के आरोप में भी हिरासत में लिया गया या डिपोर्ट किया गया। मंत्रालय के अनुसार, ये डिपोर्टेशन 1 मार्च से 13 जुलाई के बीच GCC के 6 देशों में हुए। GCC में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। पाकिस्तानियों को अलग-अलग कारणों से देश से बाहर भेजा गया। इनमें सुरक्षा संबंधी चिंताएं, वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी रुकना, अवैध तरीके से प्रवेश, भीख मांगना, ड्रग्स से जुड़े अपराध, शरण के आवेदन खारिज होना और फर्जी या गलत दस्तावेज शामिल हैं। अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का शिकार आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 4,628 ऐसे लोगों को डिपोर्ट किया गया जिन्हें फरार बताया गया था। इसके अलावा 1,294 पाकिस्तानी जेल भेजे गए, 968 लोगों को ब्लैकलिस्ट किया गया और पासपोर्ट खोने से जुड़े 1,155 डिपोर्टेशन मामले सामने आए। वहीं, 689 पाकिस्तानियों को वीजा नियमों के उल्लंघन के कारण डिपोर्ट किया गया। 342 मामलों में लोगों को खाड़ी देशों में प्रवेश ही नहीं दिया गया। हालांकि, 6,000 से ज्यादा डिपोर्टेशन को मंत्रालय ने सिर्फ ‘अन्य’ श्रेणी में रखा है। इस श्रेणी के मामलों की विस्तृत जानकारी मंत्रालय ने साझा नहीं की। सऊदी अरब से सबसे ज्यादा पाकिस्तानी निकाले गए आंकड़ों में सऊदी अरब सबसे ऊपर है। वहां से 15,500 पाकिस्तानी डिपोर्ट किए गए। इसके बाद UAE से 3,803, ओमान से 1,606, बहरीन से 521, कतर से 429 और कुवैत से 97 पाकिस्तानियों को वापस भेजा गया। पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी ने गुरुवार को पूरक सवालों के जवाब में बताया कि ये आंकड़े केवल उन लोगों के हैं जिन्हें संबंधित देशों के अधिकारियों ने औपचारिक रूप से हिरासत में लिया और फिर पाकिस्तानी मिशनों की ओर से इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किए जाने के बाद डिपोर्ट किया गया। उन्होंने साफ किया कि जो पाकिस्तानी अपनी इच्छा से वापस लौटे या वैध पासपोर्ट के साथ वापस आए, वे इन आंकड़ों में शामिल नहीं हैं। ईरानी हमलों के वीडियो बनाने पर भी हुई कार्रवाई ईरान से जुड़े संघर्ष के दौरान कुछ पाकिस्तानियों पर ईरानी हमलों से संबंधित वीडियो बनाने, पोस्ट करने या दोबारा शेयर करने के आरोप में भी कार्रवाई हुई। पाकिस्तानी अखबार Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में बहरीन ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें 5 पाकिस्तानी नागरिक थे। इन लोगों पर ईरानी हमलों के असर से जुड़े वीडियो को फिल्माने, प्रकाशित करने और दोबारा पोस्ट करने का आरोप था। संघर्ष के दौरान कुछ खाड़ी देशों में शिया समुदाय के लोगों की जांच और निगरानी भी बढ़ गई। पाकिस्तान को खाड़ी देशों ने यूं दिया करारा झटका खाड़ी देशों से इतनी बड़ी संख्या में पाकिस्तानियों के डिपोर्ट होने की खबर ने पाकिस्तान में चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र में लाखों पाकिस्तानी रहते और काम करते हैं। ये देश पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वहां काम करने वाले पाकिस्तानी बड़ी मात्रा में पैसा अपने देश भेजते हैं, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण मदद मिलती है। ऐसे में सुरक्षा जांच और डिपोर्टेशन बढ़ने से खाड़ी देशों में रहने वाले पाकिस्तानी प्रवासी कामगारों और दूसरे नागरिकों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। (PTI से इनपुट्स के साथ)
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