नेपाल में बाढ़ से मची तबाही के बाद विभिन्न जगहों पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है। नेपाल की सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सोमवार को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने का फैसला किया है।
नेपाल में बाढ़ के कारण आई तबाही से लोग अब तक उबर नहीं पाए हैं। बीते 26 अगस्त को तिब्बत के करीब रसुवा और आसपास के जिलों में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी जिससे बड़े स्तर पर जान-माल का नुकसान देखने को मिला है। इस आपदा में अब तक 1340 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 5000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। अब नेपाल की सरकार ने सोमवार को सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है।
सोमवार को राष्ट्रीय शोक दिवस
नेपाल नें 26 अगस्त को आई भयंकर तबाही में हजारों लोग बेघर हो गए जबकि अबतक हजारों लोगों के शव मिल चुके हैं। नेपाल सरकार के द्वारा भी सोमवार 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाते हुए सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की गई है। नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के प्रति सामूहिक रूप से नेपाल के विभिन्न जगहों पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। बिहार-नेपाल सीमा के रक्सौल से सटे बीरगंज महानगरपालिका के घंटाघर चौक पर श्रद्धांजलि सभा के साथ दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए दीप प्रज्वलन भी किया गया।
आपको बता दें कि नेपाल में आई आपदा को 13 दिन पूरे हो चुके हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु के 13वें दिन को शोक अवधि का अहम दिन माना जाता है। नेपाल के गृह मंत्रालय ने बताया है कि सोमवार को देशभर के सरकारी कार्यालयों और विदेशों में स्थित नेपाली राजनयिक मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।
खोज और बचाव अभियान लगातार जारी
इस आपदा ने घरों, सड़कों, पुलों, हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चरों को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। जहां सबसे ज्यादा तबाही हुई है वहां खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है। हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में भी तलाश अभियान चलाया जा रहा है। टनल में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश तेज हो गई है। नेपाल में मौजूद भारतीय सेना, NDRF और BRO वैकल्पिक रूट भी बना रहे हैं।
7500 मकान पूरी तरह से तबाह
आपको बता दें कि नेपाल में लापता लोगों की तलाश में सुरक्षाबल और बचाव दल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस आपदा की वजह से कम से कम 32,000 परिवार विस्थापित हुए हैं। वहीं, 7500 मकान पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। आपदा के कारण लोगों की आजीविका और जरूरी बुनियादी ढांचे पर भी बुरा असर पड़ा है।
