वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर फ्लॉप साबित हुए। दलीप ट्रॉफी के फाइनल की दूसरी पारी में वे 16 बॉल पर केवल 8 ही रन बनाकर पवेलियन लौट गए। वे आगे बढ़कर छक्का लगाने गए थे, लेकिन चूक गए।
वैभव सूर्यवंशी लगता है कि अभी तक टेस्ट क्रिकेट या फिर प्रथम श्रेणी मैच खेलने का ढंग नहीं सीख पाए हैं। वे एक बार फिर इसको टी20 क्रिकेट समझ बैठे और आगे बढ़कर छक्का लगाने के प्रयास में अपना विकेट गवां बैठे। उन्हें दलीप ट्रॉफी में एक और मौका मिला, जिसमें वे धैर्य से बल्लेबाजी कर सकते थे, कोई जल्दी नहीं थी, लेकिन उन्होंने एक और हाथ आया मौका गवां दिया। ये दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की ओर से खेल रहे हैं।
फाइनल की पहली पारी में 44 रन बनाकर आउट हो गए थे वैभव
दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेला जा रहा है। मैच की पहली पारी में उन्होंने 37 बॉल पर 44 रन की एक छोटी सी पारी खेली थी। इसमें उन्होंने एक छक्का और 5 चौके लगाए। उन्हें इस पारी में अपने कप्तान ईशान किशन से सीखा चाहिए था, जिन्होंने तसल्ली से बल्लेबाजी की और 270 रनों की जबरदस्त पारी खेली। उन्हीं के बल पर टीम ने 708 रनों का बड़ा स्कोर बनाया। इसके जवाब में साउथ जोन की पहली पारी केवल 336 रन पर ही सिमट गई। ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन चाहते तो साउथ जोन को फॉलोआन दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा करने की जगह खुद बल्लेबाजी करना चुना।
वैभव को मिला एक और मौका, लेकिन आगे बढ़कर खेलने के प्रयास में लौटे पवेलियन
ऐसे में वैभव सूर्यवंशी को एक और मौका मिला। वैसे तो अब लगता है कि मैच ड्रॉ हो जाएगा और पहली पारी के आधार पर ईस्ट जोन की टीम चैंपियन बन जाएगी। ऐसे में वैभव जब बल्लेबाजी के लिए आए तो कोई जल्दी नहीं थी। वे आराम से वक्त लेकर बल्लेबाजी कर सकते थे। लेकिन उनके सिर से अभी तक टी20 का आक्रामक स्टाइल हटा नहीं है। मैच की दूसरी पारी में वे 15 बॉल पर एक चौके के साथ आठ रन बना चुके थे, लेकिन 16वीं बॉल पर उन्हें ना जाने क्या सूझी कि विजय की बॉल पर आगे बढ़कर छक्का लगाने चले गए। वे चूके और बॉल सीधी विकेटकीपर जगदीशन के हाथों में गई। इससे पहले कि वैभव वापस क्रीज में आते जगदीशन ने उनकी गिल्लियां बिखेर दीं और वैभव को पवेलियन लौटना पड़ा।
तीन मैचों में लगा सके हैं केवल एक ही अर्धशतक
इस साल के दलीप ट्रॉफी में वैभव को तीन मैच और पांच पारियां मिली, लेकिन वे एक ही बार 50 का आंकड़ा पार कर पाए, जब उन्होंने सेंट्रल जोन के खिलाफ 92 रनों की एक अच्छी पारी खेली थी, बाकी दफा वे जल्दी जल्दी आउट होकर चल गए। वे ईस्ट जोन के उपकप्तान भी हैं। लेकिन वे अपना जलवा कम से कम यहां तो दिखाने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट या फिर प्रथम श्रेणी क्रिकेट किस तरह से खेला जाता है, ये बात उन्हें अभी सीखनी होगी।
