फिरोजाबाद। नाबालिग अंजली के लापता होने के पुराने मामले में अब बिहार के औरंगाबाद निवासी राज बिहारी ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस कार्रवाई और मुकदमे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। राज बिहारी का कहना है कि अंजली के लापता होने के मामले में उनका कोई हाथ नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें इस प्रकरण में परेशान किया जा रहा है। उनका दावा है कि वह मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं और मुकदमे की पैरवी में लगातार वकीलों को पैसे देने के कारण आर्थिक रूप से बेहद परेशान हो चुके हैं।
मामला नगला खंगर थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध प्रथम सूचना तथ्य के अनुसार, धमेन्द्र कुमार पुत्र नेत्रपाल सिंह निवासी सलेमपुर कर्खा ने 14 जनवरी 2025 को पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उनकी करीब 15 वर्षीय बेटी अंजली 13 जनवरी 2025 को सुबह करीब 9.30 बजे स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन दोपहर करीब 3.30 बजे तक घर वापस नहीं आई। परिवार ने स्कूल और रिश्तेदारी समेत आसपास के स्थानों पर उसकी तलाश की। तहरीर में आशंका जताई गई थी कि कोई लड़का बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले गया है।
तहरीर में दो मोबाइल नंबर 9599527103 और 7037420112 का उल्लेख किया गया था। राज बिहारी का कहना है कि ये नंबर उनके नहीं हैं, बल्कि पंकज उर्फ शिवम के बताए जा रहे हैं। उनका दावा है कि जिस व्यक्ति का नाम कभी पंकज और कभी शिवम बताया जाता था, वही अंजली के संपर्क में था। राज बिहारी के अनुसार, पंकज उर्फ शिवम का मोबाइल खराब था और उसकी स्क्रीन टूट गई थी, इसलिए वह कुछ समय के लिए राज बिहारी के फोन से एक लड़की से बात करता था। पूछने पर उसने लड़की को अपनी पत्नी बताया था।
राज बिहारी के मुताबिक, बाद में जनवरी 2025 में पंकज उर्फ शिवम अंजली नाम की लड़की को लेकर चला गया। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। राज बिहारी का आरोप है कि मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और उनके खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई की गई। उनका दावा है कि इस दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा उनसे चार लाख रुपये की मांग किए जाने की बात कही गई और कथित तौर पर कहा गया कि रकम देने पर जेल नहीं भेजा जाएगा। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पुलिस अधिकारी का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
राज बिहारी का कहना है कि वह मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद क्षेत्र के रहने वाले हैं और गुजरात में मजदूरी का काम करते थे। उनके अनुसार, वह और उनके साथ रहने वाले व्यक्ति अलग-अलग दो-दो हजार रुपये कमरे का किराया देते थे। उन्होंने बताया कि वह शादीशुदा हैं और मेहनत-मजदूरी से किसी तरह अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। मुकदमे की पैरवी और वकीलों की फीस में लगातार पैसा खर्च होने से उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है।
राज बिहारी का यह भी दावा है कि मामले में अंजली की ओर से उनके खिलाफ बयान दिया जा रहा है, जबकि उनका आरोप है कि ऐसा पंकज उर्फ शिवम को बचाने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि वह अंजली को लेकर किसी तरह की घटना में शामिल नहीं थे और उनके खिलाफ कार्रवाई गलत पहचान तथा मोबाइल नंबरों से जुड़े विवाद के कारण हुई है।
राज बिहारी ने प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले में मोबाइल नंबरों की वास्तविक उपयोगकर्ता, कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रथम सूचना में जिन मोबाइल नंबरों का उल्लेख है, वे उनके नंबर नहीं हैं और उनके अनुसार वे नंबर पंकज उर्फ शिवम से संबंधित हैं।
राज बिहारी का कहना है कि लंबे समय से चल रहे मुकदमे और आर्थिक परेशानी के कारण वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। उनका दावा है कि मेहनत-मजदूरी से कमाई गई रकम मुकदमे और वकीलों की फीस में खर्च हो रही है। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि वह खुद को बेहद असहाय महसूस कर रहे हैं और आत्महत्या जैसे कदम के बारे में सोचने की स्थिति में पहुंच गए हैं। उनके इस बयान को देखते हुए परिवार और संबंधित प्रशासन से उनकी स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की मांग भी सामने आई है।
मामले में अब राज बिहारी की मांग है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो, मोबाइल नंबरों के वास्तविक उपयोगकर्ता की पुष्टि की जाए तथा यदि जांच में उनकी भूमिका नहीं पाई जाती है तो उन्हें राहत दी जाए। वहीं, अंजली के लापता होने से संबंधित मूल मामले में पुलिस और न्यायालय के समक्ष उपलब्ध दस्तावेज तथा साक्ष्य ही अंतिम स्थिति स्पष्ट करेंगे। संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
