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Monday, October 12, 2026

पूर्णिया में जमीन की मापी को लेकर विवाद गहराया, तीन रिपोर्टों में सामने आई जमीन की अलग-अलग स्थिति; वर्षों से बने घर पर भी उठे सवाल

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पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के बीकोठी अंचल क्षेत्र में जमीन की मापी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जमीन के स्वामित्व और सीमांकन से जुड़े इस मामले में आवेदक रामू दास उर्फ गोसाई दास ने अंचल कार्यालय में हुई अलग-अलग मापियों पर सवाल उठाते हुए भूमि सुधार उपसमाहर्ता, धमदाहा के न्यायालय में भू-मापी अपील दायर की है। आवेदक का कहना है कि पहले हुई मापी में जिस जमीन की सीमा तय की गई थी, बाद की मापियों में उसी जमीन की स्थिति बदल गई। विवाद अब करीब दो डिसमिल जमीन और उस पर वर्षों से बने मकान तक पहुंच गया है। आवेदक ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सही सीमांकन कराने की मांग की है।

आवेदक रामू दास उर्फ गोसाई दास, पिता स्वर्गीय छट्टू दास, निवासी लौकाही चकला, किला टोला, वार्ड नंबर 4, थाना बीकोठी, जिला पूर्णिया के अनुसार, उन्होंने मौजा रुस्तमपुर में खाता संख्या 54 और खेसरा संख्या 140/476 से संबंधित कुल 10 डिसमिल जमीन खरीदी थी। इस जमीन की मापी बीकोठी अंचल के अमीन से कराई गई थी, जिसका भू-मापी अभिलेख संख्या 129/2022-23 है। दस्तावेजों में दर्ज विवरण के मुताबिक, 6 अप्रैल 2023 को हुई इस मापी के दौरान दोनों पक्षों के अलावा चौहद्दीदार और ग्रामीण भी मौजूद थे। आवेदक का दावा है कि उस समय मापी सौहार्दपूर्ण वातावरण में पूरी हुई और सीमा निर्धारित करने के लिए कील, खूंटे और पिलर भी लगाए गए थे।

रामू दास का कहना है कि पहली मापी के बाद विपक्षी पक्ष ने भी निर्धारित सीमा को स्वीकार करते हुए अपनी ओर पक्की दीवार बनाकर कब्जा रखा था। उनके मुताबिक, इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक इस सीमांकन को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं था। लेकिन वर्ष 2026 में दोबारा मापी कराए जाने के बाद जमीन की सीमा को लेकर विवाद फिर खड़ा हो गया। आवेदक का आरोप है कि नई मापी में उनके वर्षों से बने मकान के हिस्से को भी विपक्षी पक्ष की जमीन में दर्शा दिया गया, जिससे उनका घर और जमीन दोनों विवाद के दायरे में आ गए।

अपील में दर्ज विवरण के अनुसार, विपक्षी पक्ष की ओर से 14 जुलाई 2026 को भू-मापी अभिलेख संख्या 331/2026-27 के तहत मापी कराई गई। आवेदक का आरोप है कि इस मापी में पहले से निर्धारित सीमा से अलग स्थिति दर्शाते हुए उनके मकान से जुड़ी करीब दो डिसमिल जमीन, जिसका उल्लेख 492 वर्गकड़ी के रूप में किया गया है, विपक्षी पक्ष की जमीन में निकाल दी गई। आवेदक ने इस रिपोर्ट को गलत और एकपक्षीय बताते हुए इस पर आपत्ति जताई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मापी रिपोर्टों की आधिकारिक जांच होना बाकी है।

विवाद के बाद आवेदक ने 1 अगस्त 2026 को फिर से मापी कराने के लिए आवेदन दिया। इसके तहत भू-मापी अभिलेख संख्या 461/2026-27 तैयार हुआ। रामू दास का कहना है कि इस मापी में भी करीब दो डिसमिल जमीन की स्थिति पहले की रिपोर्ट से मेल नहीं खाती। उनके अनुसार, एक मापी में जमीन का हिस्सा विपक्षी पक्ष की ओर दिखाया गया, जबकि दूसरी मापी में उसी क्षेत्र की सीमा अलग तरीके से दर्शाई गई। आवेदक ने सवाल उठाया है कि जब जमीन एक ही है, तो अलग-अलग मापी रिपोर्टों में सीमांकन की स्थिति में इतना अंतर कैसे आ गया। उन्होंने पूरे प्रकरण में मापी की प्रक्रिया और रिपोर्टों की दोबारा जांच कराने की मांग की है।

आवेदक की अपील में यह भी उल्लेख किया गया है कि 14 जुलाई 2026 की मापी रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति हासिल करने में परेशानी हुई। उनके अनुसार, 10 सितंबर 2026 को ऑनलाइन जांच प्रतिवेदन की प्रति लेने की कोशिश की गई, लेकिन संबंधित रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरी प्रति नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने अंचल कार्यालय में आवेदन दिया और भूमि सुधार उपसमाहर्ता, धमदाहा से संपर्क किया। आवेदक का कहना है कि उन्हें भू-मापी अपील दायर करने की सलाह दी गई। बाद में अधिवक्ता से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज जुटाए गए और 6 अक्टूबर 2026 को भू-मापी अपील दाखिल की गई। विलंब को लेकर अलग से क्षमा आवेदन भी प्रस्तुत किया गया है।

मामले में एक अन्य गंभीर पहलू यह है कि आवेदक ने अपने आवेदन में परिवार के साथ विवाद बढ़ने और मारपीट की आशंका भी जताई है। शुरुआती शिकायत में कहा गया है कि जमीन की सीमा को लेकर विरोध करने पर विपक्षी पक्ष के साथ तनाव बढ़ गया है और पक्की ईंट की दीवार बनाए जाने को लेकर भी विवाद है। आवेदक ने यह भी उल्लेख किया है कि करीब एक-दो महीने पहले उनके पिता के साथ कथित तौर पर लाठी-डंडों से मारपीट की गई थी। उनका कहना है कि परिवार में वे अकेले हैं और विवाद के कारण उन्हें किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित पक्षों और पुलिस अथवा प्रशासनिक अभिलेखों से होना आवश्यक है।

रामू दास उर्फ गोसाई दास ने भूमि सुधार उपसमाहर्ता, धमदाहा से मांग की है कि उनकी भू-मापी अपील स्वीकार कर सभी संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए। उनका आग्रह है कि पूर्व की मापी रिपोर्ट संख्या 129/2022-23, दिनांक 6 अप्रैल 2023, तथा बाद की मापी रिपोर्ट संख्या 331/2026-27 और 461/2026-27 का तुलनात्मक परीक्षण कराया जाए। साथ ही, विवादित जमीन का निष्पक्ष तरीके से दोबारा सीमांकन कराकर यह स्पष्ट किया जाए कि वास्तविक सीमा कहां है और वर्षों से बने मकान का हिस्सा किस जमीन में आता है। आवेदक ने कथित अतिक्रमण और विवाद को रोकने के लिए भी प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल इस मामले में अंतिम स्थिति संबंधित अभिलेखों की जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगी। अब देखना होगा कि भूमि सुधार उपसमाहर्ता का कार्यालय अलग-अलग मापी रिपोर्टों में बताए गए अंतर की जांच कराकर विवाद का समाधान किस तरह करता है। जमीन की सीमा को लेकर चल रहा यह विवाद आवेदक के लिए केवल भूमि का मामला नहीं, बल्कि उनके वर्षों पुराने मकान और परिवार की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न भी बन गया है।

 

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