बेलदारी कर दो बच्चों का पालन पोषण कर रहे अनुज की जिंदगी संघर्षों में गुजरी, आर्थिक तंगी के बीच पक्के मकान की आस में परिवार की मुश्किलें बढ़ीं
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुहब्बतपुर रौजा गांव से एक ऐसी दर्दभरी कहानी सामने आई है, जो प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और जरूरतमंदों को आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। शाहगढ़ पोस्ट क्षेत्र के निवासी अनुज प्रजापति का कहना है कि वर्ष 2012 में आई बाढ़ के कारण उनका घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। मकान टूटकर गिर गया और तभी से वह अपने परिवार के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
अनुज प्रजापति के अनुसार, घर की हालत खराब होने के बावजूद आर्थिक मजबूरी के चलते उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। वह किसी तरह टूटे हुए मकान में रहकर अपने जीवन की गाड़ी खींच रहे हैं। करीब 14 वर्षों से आवास की समस्या से जूझ रहे अनुज के लिए परिवार की जरूरतों को पूरा करना और सुरक्षित छत का इंतजाम करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
दिव्यांग होने के बावजूद मजदूरी कर चला रहे परिवार
अनुज प्रजापति ने बताया कि वह दिव्यांग हैं और अपनी आजीविका चलाने के लिए बेलदारी का काम करते हैं। मजदूरी से होने वाली सीमित आमदनी में उन्हें अपने जीवनयापन और बच्चों की जरूरतों को पूरा करना पड़ता है। एक ओर जर्जर मकान की समस्या है, तो दूसरी ओर आर्थिक तंगी के कारण नया घर बनवाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है।
उनकी जिंदगी में पारिवारिक परेशानियां भी कम नहीं रही हैं। अनुज के मुताबिक, घर की खराब परिस्थितियों और पारिवारिक विवादों के बीच उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गई। उनके दो बच्चे हैं, जिनमें से एक बच्चे को वह अपने साथ ले गईं, जबकि दूसरा बच्चा अनुज के पास रह गया। ऐसे में दिव्यांग पिता के सामने अपने बच्चे की देखभाल करने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने की चुनौती भी है।
14 साल बाद भी पक्के मकान की आस
अनुज प्रजापति की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें आवास योजना का लाभ दिलाए, ताकि वह अपने और अपने बच्चे के लिए सुरक्षित घर की व्यवस्था कर सकें। उनका कहना है कि दिव्यांग होने के बावजूद वह मेहनत मजदूरी करके जीवनयापन कर रहे हैं, लेकिन सीमित आय के कारण टूटे हुए मकान की मरम्मत कराना या नया घर बनवाना उनके बस में नहीं है।
वर्ष 2012 की बाढ़ से प्रभावित होने के बाद से घर की समस्या उनके जीवन का सबसे बड़ा संकट बनी हुई है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन उनकी परिस्थिति का संज्ञान लेकर उनकी मदद करेगा।
सरकार और प्रशासन से मदद की अपील
अनुज प्रजापति ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि उनके परिवार की स्थिति का स्थलीय सत्यापन कराया जाए और पात्रता के आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य उपयुक्त सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि उन्हें पक्का मकान मिल जाता है, तो वह अपने बच्चे के साथ सुरक्षित वातावरण में रह सकेंगे और जीवन को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा पाएंगे।
