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Thursday, October 15, 2026

जेल में सफेद कपड़ों में नजर आएंगे मुस्कान-साहिल, अब कैदी नंबर से होगी पहचान; फांसी की सजा के बाद बदली जिंदगी

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फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान और साहिल दोनों का पहनावा अब बदरंग होने वाला है। इसके अलावा दोनों के नाम और पहचान सब बदल जाएगा। दोनों की हाजिरी ‘कैदी नम्बर हाजिर हो’ के मुताबिक होगी।
मेरठ: चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत से फांसी की सजा मिलने के बाद चौधरी चरण सिंह कारावास में बंद मुस्कान और साहिल की जिंदगी में कई परिवर्तन होने जा रहे हैं। अब दोनों विचाराधीन बंदी नहीं, बल्कि सजायाफ्ता कैदी माने जाएंगे। इसके साथ ही उनके पहनावे, पहचान, कामकाज, भोजन और निगरानी की जेल के नियमों के मुताबिक होगी। जेल में दोनों की पहचान नाम के साथ-साथ कैदी नंबर से दर्ज की जाएगी, यानी नाम और पहचान सब बदल जायेगी, दोनों की हाजिरी ‘कैदी नम्बर हाजिर हो’ के मुताबिक होगी।
मेरठ जेल में साहिल को कैदी नंबर 395, जबकि मुस्कान को कैदी नंबर 396 आवंटित किया गया है। मुस्कान को बैरक नंबर 12बी में रखा गया है, वहीं साहिल बैरक नंबर 15 में रहेगा। जेल में दोनों की दिनचर्या अब नए सिरे से तय हो रही है।

सफेद कपड़ों में नजर आएंगे मुस्कान और साहिल
सजा सुनाए जाने के बाद दोनों का पहनावा अब बदरंग होने वाला है। जेल नियमों के मुताबिक विचाराधीन बंदियों को जब तक सजा का ऐलान नही होता है, तब तक वह अपने कपड़े पहन सकते है, लेकिन सजायाफ्ता कैदी बन जाने पर जेल के नियमों मजबूती के साथ पालन करना होता है। इसके नियम के तहत मुस्कान को सफेद या हल्के क्रीम रंग की साड़ी अथवा सलवार-सूट पहनना होगा, जबकि साहिल सफेद कुर्ता-पैंट में नजर आएगा।

जेल में दोनों की गिनती, निगरानी और संबंधित रिकॉर्ड में कैदी नंबर के आधार पर दर्ज होगी। जिसके चलते उनकी पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था सजायाफ्ता कैदियों में की जायेंगी।

अलग-अलग बैरकों में रहेंगे दोनों, नहीं होगी मुलाकात
मुस्कान और साहिल 19 मार्च 2025 से चौधरी चरण सिंह जिला मेरठ जेल में बंद हैं। अपनी सजा निर्धारण से पहले मुकदमे की सुनवाई के दोनों जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा अदालती कार्यवाही में शामिल होते रहे। हालांकि इस दौरान कई पेशी के दौरान दोनों को रूबरू होने का मौका भी मिला था पर अब उन्हें एक-दूसरे को देखने का अवसर शायद नही मिले, क्योंकि सजा सुनाए जाने के बाद जेल में उनकी व्यवस्था अलग-अलग रहेगी।

मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा मुताबिक मुस्कान महिला बंदियों की बैरक में रहती है, जबकि साहिल पुरुष बंदियों के बीच रखा गया है। दोनों के बीच न तो वैवाहिक संबंध है और न ही खून का रिश्ता। ऐसे में जेल के लागू नियमों के तहत उनकी आपस में मुलाकात की अनुमति नहीं होगी।

बैरक बदलने पर भी हो सकता है फैसला
फिलहाल मुस्कान महिला बंदियों की बैरक संख्या 12A में है। वहीं सजा के बाद साहिल की बैरक में बदलाव किया जा सकता है। महिला बंदियों के लिए बैरकों की सीमित उपलब्धता को देखते हुए मुस्कान को दूसरी बैरक में शिफ्ट भी करने का निर्णय लिया जा सकता है, यह निर्णय उपलब्ध व्यवस्था के आधार पर होगा।

जेल प्रशासन अब दोनों की व्यवस्था सजायाफ्ता कैदियों पर लागू होने वाले नियमों और जेल मैनुअल के मुताबिक तय करेगा।

साहिल को सौंपा जा सकता है जेल का काम
सजायाफ्ता कैदियों के लिए जेल में कामकाज की व्यवस्था भी निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। साहिल को भी उसकी जिम्मेदारी और जेल प्रशासन के निर्णय के आधार पर काम सौंपा जा सकता है। हालांकि इस समय जेल में साहिल अपनी इच्छा के मुताबिक खेतीबाड़ी का काम कर रहा है, अब जेल प्रशासन काम की प्रकृति और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसकी जिम्मेदारी और काम तय करेगा।

दूसरी तरफ मुस्कान के साथ उसकी लगभग 8 माह की बेटी राधा भी जेल में रह रही है। जेल प्रशासन ऐसे में बच्ची की देखभाल को प्राथमिकता देते हुए मुस्कान से काम कराने के संबंध में अलग व्यवस्था अपनाई जा सकती है।

भोजन और निगरानी के नियम भी होंगे लागू
जेल प्रशासन के मुताबिक, सजायाफ्ता कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन दिया जाता है। काम की प्रकृति और जरूरत के हिसाब से भोजन देने और उसकी मात्रा में बदलाव की संभवना है। मुस्कान और साहिल की दिनचर्या, गिनती और निगरानी जेल के नियमों के अनुरूप होने वाली है।

सजा सुनते ही रोने लगे दोनों, खाना लिया लेकिन नहीं खाया
इससे पहले खबर सामने आई थी कि मेरठ के नीले ड्रम केस में मौत की सजा सुनते ही मुस्कान और साहिल रोने लगे। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान और साहिल लगातार रो रहे हैं। दोनों ने खाना तो लिया, लेकिन उसे खाया नहीं। वहीं, मुस्कान ने अपनी बेटी के खान-पान का पूरा ध्यान रखा।

नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद अब दोनों को जेल में सजायाफ्ता कैदियों के रूप में रहना होगा। उनके पहनावे से लेकर कामकाज और निगरानी तक की व्यवस्था जेल प्रशासन निर्धारित नियमों के अनुरूप तय करेगा।

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