बिहार के नालंदा जिले में जमीन से जुड़े विवाद को लेकर एक परिवार ने सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अस्थावां प्रखंड के बेनार मौजा में स्थित जमीन, जो मसुमात तोलड़ देवी पत्नी झमन महतो के नाम से बताई जा रही है, उसके खतियान में कथित रूप से बदलाव कराए गए और कर्मचारी के माध्यम से ऑनलाइन रसीद भी कटवा ली गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस पूरे मामले में अंचल कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए, ताकि जमीन के वास्तविक हकदार को उसका अधिकार मिल सके।
शिकायत में बताया गया है कि जमीन के कागजात और खतियान से जुड़े मामले में कथित रूप से बटिया चढ़वाने की कार्रवाई हुई और ऑनलाइन रसीद भी जारी कराई गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वे इस संबंध में एसडीएम से भी मिल चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीन को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ। उनका कहना है कि अब जब वे जमीन पर अपना अधिकार मांगने जाते हैं, तो दूसरे पक्ष के लोग जमीन पर अपना दावा जताते हैं और उन्हें जमीन का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, खतियान में बदलाव, रसीद जारी होने और जमीन के स्वामित्व से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि यह मामला कांग्रेस शासनकाल के दौरान का है। उनका कहना है कि अब वे चाहते हैं कि वर्तमान सरकार पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और राजस्व अभिलेखों के आधार पर वास्तविक हकदार की पहचान करके उसे न्याय दिलाए। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जमीन के खतियान, ऑनलाइन लगान रसीद, संबंधित दाखिल-खारिज या अन्य राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि वे अपनी समस्या इन नेताओं के सामने रखकर न्याय की मांग करना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने रजत शमी से फोन पर बातचीत कराने की भी इच्छा व्यक्त की है, ताकि अपनी बात संबंधित लोगों तक पहुंचा सकें।
शिकायत में तोलड़ देवी पत्नी झमन महतो, रामप्रसादी महतो और सिया शरण प्रसाद के नाम भी सामने आए हैं। संपर्क के लिए मोबाइल नंबर 9162217859 दिया गया है। शिकायतकर्ताओं ने देवन्दन प्रसाद, सुरेश प्रसाद, आमा कुमारी और कंचन देवी के नामों का भी उल्लेख किया है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इन सभी व्यक्तियों की भूमिका और जमीन से संबंधित कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए मामले में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले राजस्व दस्तावेजों, संबंधित पक्षों के बयान और प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जमीन के मूल खतियान में दर्ज विवरण क्या हैं, ऑनलाइन रसीद किस आधार पर जारी हुई और संबंधित राजस्व अधिकारियों के पास इस मामले में कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध हैं। शिकायतकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जमीन के वास्तविक स्वामित्व का निर्धारण हो और पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार दिलाया जाए। फिलहाल, संबंधित अंचल कार्यालय और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। उनकी प्रतिक्रिया और दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
