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Tuesday, October 20, 2026

दिल्ली में कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद खुले आंगन में निर्माण का आरोप, 65 वर्षीय बुजुर्ग ने न्याय के लिए लगाई गुहार; परिवार का दावा, आदेशों की अवहेलना कर कब्जे की कोशिश

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दिल्ली। राजधानी दिल्ली के संगम विहार इलाके में मकान के खुले आंगन और खाली जगह को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। इस मामले में 65 वर्षीय बुजुर्ग सुरजन, निवासी मकान नंबर ए-25, संगम विहार, नई दिल्ली ने न्यायालय के आदेशों का कथित उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। अदालत में प्रस्तुत शपथपत्र और आवेदन में आरोप लगाया गया है कि संपत्ति विवाद के दौरान विपक्षी पक्ष ने निषेधाज्ञा के बावजूद खुले स्थान पर टीन की चादर लगाई, पानी का कूलर रखा और अन्य सामान रखकर जगह घेर ली। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद भी विवादित गतिविधियां जारी रहने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

न्यायालय में उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला श्री अभितोष प्रताप सिंह की अदालत में विचाराधीन वाद संख्या 587/2021 से संबंधित है। मामले में सुरजन वादी और श्रीमती लक्ष्मी प्रतिवादी के रूप में दर्ज हैं। सुरजन की ओर से प्रस्तुत शपथपत्र में कहा गया है कि वह इस मुकदमे के वादी हैं और मामले से जुड़े तथ्यों तथा परिस्थितियों से परिचित हैं। दस्तावेज में 29 जनवरी 2024 को पारित न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी ने आदेश के बावजूद विवादित संपत्ति के खुले हिस्से में हस्तक्षेप किया।

वादी पक्ष के आरोपों के अनुसार, मकान के आंगन यानी खुले हिस्से में टीन की चादर लगाई गई। इसके अलावा वहां पानी का कूलर रखा गया और उसके ऊपर पट्टा रखकर चादर से ढक दिया गया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि खुले स्थान के करीब चार से पांच हिस्सों में अन्य सामान रखकर जगह घेर ली गई। वादी पक्ष का दावा है कि इन गतिविधियों से संबंधित तस्वीरें आवेदन के साथ न्यायालय में पेश की गई हैं। हालांकि, इन आरोपों और तस्वीरों के आधार पर किसी उल्लंघन की अंतिम पुष्टि न्यायालय के निर्णय से ही होगी।

सुरजन की ओर से दाखिल आवेदन में यह भी कहा गया है कि प्रतिवादी ने अदालत के समक्ष कथित तौर पर यह आश्वासन दिया था कि वह विवादित संपत्ति में बाथरूम या किसी अन्य प्रकार का निर्माण नहीं करेगी। वादी पक्ष का आरोप है कि इसके बावजूद खुले हिस्से में चादर लगाने और अन्य सामान रखने जैसी गतिविधियां की गईं। इसी आधार पर अदालत के आदेश और कथित आश्वासन की अवहेलना किए जाने का मुद्दा उठाया गया है।

दस्तावेजों में वादी पक्ष ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 नियम 2-ए तथा धारा 151 के तहत कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी ने जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है और वादी को परेशान किया जा रहा है। वादी पक्ष ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा आवश्यक होने पर सिविल कारावास का आदेश पारित करने की प्रार्थना की है। यह मांग वादी पक्ष की ओर से की गई है; इस संबंध में अदालत ने क्या अंतिम निर्णय दिया है, इसकी जानकारी उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट नहीं होती।

शपथपत्र में सुरजन ने कहा है कि आवेदन उनके निर्देश पर अधिवक्ता द्वारा तैयार किया गया है और उसकी सामग्री उन्हें उनकी भाषा में पढ़कर समझाई गई है। उन्होंने दस्तावेज की सामग्री को अपनी जानकारी के अनुसार सही बताते हुए उस पर हस्ताक्षर किए हैं। दस्तावेज पर 23 दिसंबर 2024 की तारीख का उल्लेख भी दिखाई देता है। इसके साथ ही न्यायालय में पहले से दाखिल आवेदन और संशोधित वादपत्र का संदर्भ दिया गया है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि संपत्ति विवाद के कारण उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उनकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। परिवार ने शासन-प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने, न्यायालय के आदेशों की स्थिति की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। परिवार का कहना है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई और विवाद का कानूनी समाधान चाहिए, ताकि मकान के खुले हिस्से को लेकर चल रहा विवाद आगे न बढ़े।

इस मामले में निष्पक्ष स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित न्यायालय के आदेश, वर्तमान मुकदमे की स्थिति और दोनों पक्षों के बयानों का परीक्षण जरूरी है। प्रतिवादी पक्ष का जवाब तथा कथित उल्लंघन पर न्यायालय की अंतिम टिप्पणी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित न्यायालय में दाखिल आवेदन पर क्या कार्रवाई होती है और बुजुर्ग सुरजन को इस विवाद में क्या राहत मिलती है।

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