दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सुंदर नगर इलाके में 29 वर्षीय फारूक की मौत का मामला अब उसकी मां आसमा के लिए इंसाफ की लड़ाई बन गया है। जिस बेटे को मां ने मेहनत करके बड़ा किया, जो पिछले 13 साल से सिलाई का काम कर अपनी जिंदगी गुजार रहा था और परिवार के लिए सहारा बना हुआ था, उसकी अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। मां आसमा का आरोप है कि उनके बेटे की मौत सामान्य हादसे में नहीं हुई, बल्कि उसके साथ मारपीट कर उसकी जान ली गई। वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
13 साल से सिलाई का काम कर रहा था फारूक आसमा के परिवार में चार बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटे और एक बेटी शामिल हैं। उनका कहना है कि फारूक 29 साल का था और पिछले करीब 13 वर्षों से सिलाई का काम कर रहा था। मां के मुताबिक, फारूक सीधा-साधा और ईमानदार लड़का था। वह मेहनत करके अपना जीवन बिताता था और परिवार के साथ उसका गहरा लगाव था। बेटे की मौत के बाद से आसमा का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद उन्हें अपने बेटे का शव देखने की नौबत आ गई।
19 सितंबर को घूमने जाने की बात कहकर घर से निकला था फारूक आसमा के अनुसार, 19 सितंबर को फारूक अपनी बुआ के बेटे हसीन के साथ गया था। हसीन की उम्र करीब 25 वर्ष बताई गई है। दोनों के बीच पहले से मेलजोल था और वे अक्सर साथ उठते-बैठते तथा घूमते-फिरते थे। आसमा का कहना है कि उस दिन भी हसीन फारूक को यह कहकर अपने साथ ले गया था कि दोनों कहीं घूमने जा रहे हैं।
परिजनों को उम्मीद थी कि फारूक कुछ समय बाद घर लौट आएगा, लेकिन रात होने के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। जब काफी देर तक फारूक वापस नहीं आया तो मां को चिंता होने लगी। उन्होंने बेटे के बारे में जानकारी लेने के लिए फोन किया। आसमा का आरोप है कि फोन पर हसीन ने पहले उन्हें आश्वासन दिया कि वे आ रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी फारूक घर नहीं पहुंचा।
फोन पर मिली एक्सीडेंट की सूचना, परिवार के उड़े होश आसमा के मुताबिक, बाद में हसीन की मां नरगिस ने फोन उठाया और बताया कि फारूक का एक्सीडेंट हो गया है। यह खबर सुनते ही आसमा और उनके पति घबराकर अस्पताल पहुंचे। मां को उम्मीद थी कि उनका बेटा घायल होगा और इलाज के बाद ठीक हो जाएगा, लेकिन अस्पताल में जो स्थिति सामने आई, उसने परिवार को तोड़कर रख दिया।
आसमा का दावा है कि अस्पताल में फारूक की हालत बेहद गंभीर थी और उसके गर्दन के पास सरिये जैसी वस्तु से चोट के छह निशान दिखाई दे रहे थे। उनका कहना है कि चोटों की स्थिति देखकर उन्हें संदेह हुआ कि बेटे के साथ कोई गंभीर घटना हुई है। आसमा सवाल उठा रही हैं कि यदि फारूक का एक्सीडेंट हुआ था, तो उसके शरीर पर इस तरह के निशान कैसे आए। हालांकि, चोटों की वास्तविक प्रकृति और मौत के कारणों की पुष्टि चिकित्सकीय रिपोर्ट तथा पुलिस जांच से ही हो सकती है।
मां ने जताया साजिश का संदेह बेटे की मौत के बाद आसमा ने हसीन, उसकी मां नरगिस और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका पर संदेह जताया है। उनका आरोप है कि फारूक की मौत को एक्सीडेंट बताकर मामले को दूसरा रूप देने की कोशिश की गई। आसमा ने नरगिस के पति युसूफ और आशिया, अरबाज खान सहित कुछ अन्य लोगों पर भी कथित साजिश में शामिल होने का संदेह व्यक्त किया है।
आसमा का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की मौत से जुड़े कई सवालों के जवाब चाहिए। वह जानना चाहती हैं कि फारूक के साथ उस रात क्या हुआ था, उसे अस्पताल किस परिस्थिति में पहुंचाया गया और उसकी मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जिन लोगों पर संदेह जताया गया है, उनकी भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
मां की मांग, निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को मिले सजा आसमा का कहना है कि बेटे की मौत के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। जिस बेटे को उन्होंने अपने सामने बड़ा होते देखा और जिससे परिवार को कई उम्मीदें थीं, उसके जाने से उनकी जिंदगी में ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं है। उनका आरोप है कि उन्हें अब तक उन सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले हैं, जो फारूक की मौत को लेकर उनके मन में उठ रहे हैं।
आसमा प्रशासन से मांग कर रही हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, फारूक की मौत के कारणों का पता लगाया जाए और यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। वह चाहती हैं कि उनके बेटे की मौत का सच सामने आए और परिवार को न्याय मिले।
कई सवालों के जवाब मिलने बाकी फारूक की मौत को लेकर सबसे अहम सवाल यह है कि क्या उसकी मौत वास्तव में सड़क दुर्घटना में हुई थी या इसके पीछे कोई दूसरी घटना थी। उसके शरीर पर बताए जा रहे चोट के निशानों की प्रकृति क्या थी, घटना के समय उसके साथ कौन-कौन मौजूद था और अस्पताल पहुंचने से पहले क्या हुआ था, इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।
मामले में पुलिस की कार्रवाई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल आसमा के आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
बेटे को खो चुकी मां आसमा की एक ही मांग है कि फारूक की मौत का सच सामने आए, मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि उसके साथ कोई अपराध हुआ है तो जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत सजा मिले। अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।
