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Thursday, October 22, 2026

आदि पराशक्ति से ज्ञान प्राप्त होने का दावा, किन्नर समाज से लेकर अनाथ और दिव्यांगों तक के लिए आश्रय स्थल बनाने का प्रस्ताव; 63 वर्षीय अशोक पाल सिंह ने टीवी पर अपनी बात रखने की जताई इच्छा

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मोहाली, पंजाब। समाज में बढ़ते अत्याचार, बच्चों के साथ होने वाली कथित छेड़छाड़, चोरी की घटनाओं और बेसहारा लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए 63 वर्षीय अशोक पाल सिंह ने एक अनूठी पहल का विचार सामने रखा है। मोहाली के सेक्टर-73 स्थित मकान नंबर 74, इंडस्ट्रियल एरिया के निवासी अशोक पाल सिंह का दावा है कि पिछली नवरात्रि के दौरान उन्हें आदि पराशक्ति से विशेष ज्ञान प्राप्त होने का अनुभव हुआ। उनका कहना है कि इस ज्ञान के आधार पर वह समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं, जहां उन्हें रहने, शिक्षा प्राप्त करने और सुरक्षित जीवन जीने का अवसर मिल सके। वह अपने विचारों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए टेलीविजन पर आकर अपनी बात रखने की इच्छा भी जता रहे हैं।

अशोक पाल सिंह के अनुसार, समाज में ऐसे अनेक लोग हैं जिन्हें रहने के लिए सुरक्षित स्थान, भोजन, शिक्षा और देखभाल की आवश्यकता है। इनमें किन्नर समाज के लोग, बुजुर्ग, दिव्यांग, अनाथ बच्चे और बेसहारा व्यक्ति शामिल हैं। उनका मानना है कि इन वर्गों के लिए अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्थित आश्रय स्थल बनाए जाने चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति मजबूरी में असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को विवश न हो। वह चाहते हैं कि उनकी इस सोच पर संबंधित अधिकारी, सामाजिक संस्थाएं और जनप्रतिनिधि ध्यान दें तथा जरूरतमंद लोगों के लिए व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम करें।

अशोक पाल सिंह ने रेलवे लाइनों, सड़कों और नहरों के आसपास उपलब्ध खाली जमीन के उपयोग को लेकर भी अपना प्रस्ताव बताया है। उनके विचार के मुताबिक, लगभग हर 35 किलोमीटर की दूरी पर ऐसी इमारत बनाई जा सकती है, जहां किन्नर समाज और बुजुर्गों को रहने की सुविधा मिले। इसके अलावा, दिव्यांग और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए रेलवे स्टेशनों या रेल मार्गों के आसपास उपयुक्त स्थानों पर भवन बनाने का सुझाव दिया है। हालांकि, रेलवे लाइन, सड़क और नहर के आसपास किसी भी प्रकार का निर्माण संबंधित विभागों की अनुमति, भूमि के स्वामित्व, सुरक्षा मानकों और कानूनी नियमों के अधीन ही संभव हो सकता है।

उनका कहना है कि अनाथ बच्चों और ऐसे लोगों के लिए भी अलग व्यवस्था होनी चाहिए, जिनके माता-पिता नहीं हैं या जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। अशोक पाल सिंह चाहते हैं कि ऐसे आश्रय स्थलों में केवल रहने की सुविधा ही न हो, बल्कि बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। उनके विचार में शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिलने से बेसहारा बच्चों को बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिल सकता है। वह चाहते हैं कि समाज के संपन्न लोग, सरकार और सामाजिक संगठन मिलकर इस दिशा में योगदान दें।

अशोक पाल सिंह का दावा है कि उन्हें आदि पराशक्ति से प्राप्त ज्ञान के माध्यम से समाज में व्याप्त कई समस्याओं के समाधान का मार्ग समझ में आया है। उनका कहना है कि बच्चों के साथ होने वाली छेड़छाड़, चोरी और अन्य अपराधों जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए भी उनके पास कुछ विचार हैं, जिन्हें वह लोगों के सामने रखना चाहते हैं। हालांकि, इन दावों और प्रस्तावित समाधानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अपराधों पर रोक लगाने के लिए कानून का प्रभावी पालन, पुलिस की कार्रवाई, बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता और सामाजिक सहयोग जैसे व्यावहारिक उपाय भी महत्वपूर्ण हैं।

अशोक पाल सिंह की इच्छा है कि उन्हें टेलीविजन पर जनता के सामने अपनी बात रखने का अवसर मिले, ताकि वह अपने विचार विस्तार से साझा कर सकें। उनका मानना है कि यदि उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए, तो जरूरतमंद लोगों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है। वह अपने कथित आध्यात्मिक अनुभव को समाज सेवा से जोड़कर देखते हैं और चाहते हैं कि उनके विचार अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचें।

उनके प्रस्ताव में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बेसहारा लोगों को सुरक्षित आवास, बच्चों को शिक्षा और बुजुर्गों तथा दिव्यांगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की सोच है। हालांकि, इन योजनाओं को वास्तविक रूप देने के लिए भूमि की उपलब्धता, आर्थिक संसाधनों, प्रशासनिक अनुमति, प्रशिक्षित कर्मचारियों और संबंधित विभागों के सहयोग की आवश्यकता होगी। प्रस्ताव पर विचार करते समय लाभार्थियों की सुरक्षा और उनकी जरूरतों को प्राथमिकता देना भी जरूरी होगा।

फिलहाल, अशोक पाल सिंह अपने विचारों को सार्वजनिक मंच पर रखने और समाज के लिए कुछ करने का अवसर मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह अपने कथित आध्यात्मिक ज्ञान को लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, ताकि समाज में व्याप्त समस्याओं के समाधान पर चर्चा हो सके। अब देखना होगा कि उनके प्रस्तावों को लेकर संबंधित सामाजिक संस्थाएं और प्रशासन किस प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं।

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