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Thursday, February 12, 2026

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन, लंबी बीमारी के बाद ली अंतिम सांस

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पुणे से पूर्व सांसद, रेल राज्य मंत्री तथा भारतीय ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी (उम्र 81 वर्ष) का मंगलवार, 6 जनवरी को तड़के सुबह 3:30 बजे पुणे में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का सोमवार को निधन हो गया है। सोमवार को कलमाड़ी के पारिवारिक सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है। जानकारी के मुताबिक, सुरेश कलमाड़ी 81 साल के थे और बीते लंबे समय से बीमार चल रहे थे। मंगलवार को तड़के सुबह 3:30 बजे पुणे में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया।
कब होगा अंतिम संस्कार?
सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरेश कलमाड़ी का पार्थिव शरीर आज दोपहर 2 बजे तक एरंडवणे स्थित कलमाड़ी हाउस में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। वहीं, उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर 3:30 बजे वैकुंठ स्मशानभूमि, नवी पेठ, पुणे में किया जाएगा। सुरेश कलमाड़ी के परिवार में उनकी पत्नी, एक विवाहित पुत्र, पुत्रवधू, दो विवाहित पुत्रियां, दामाद और पोते-पोतियां हैं।
कलमाड़ी ने कौन से पद संभाले?
सुरेश कलमाड़ी महाराष्ट्र के पुणे से पूर्व सांसद थे। वह केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री तथा भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके थे। सुरेश कलमाड़ी एक ऐसा नाम था जिसने भारतीय खेल जगत से लेकर दिल्ली की सत्ता तक अपनी एक अलग पहचान बनाई, आज उस सफर का अंत हो गया हैपायलट से राजनेता तक का सफर
सुरेश कलमाड़ी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि उन्हें ‘पुणे का किंगमेकर’ माना जाता था। भारतीय वायु सेना में पायलट के तौर पर अपना करियर शुरू करने वाले कलमाडी बाद में राजनीति में आए। वे कई बार सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। पुणे के इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है
लंबे समय तक भारतीय खेलों की कमान संभाली
खेलों के प्रति सुरेश कलमाड़ी का जुनून जगजाहिर था। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने लंबे समय तक भारतीय खेलों की कमान संभाली। 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हुए। हालांकि, इन खेलों से जुड़े विवादों ने उनके राजनीतिक करियर पर साया भी डाला, लेकिन खेलों को बड़े स्तर पर लाने का श्रेय भी उन्हीं को दिया जाता है। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं समेत विभिन्न दलों के दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पुणे ने अपना एक कद्दावर नेता खो दिया है।”

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