4.5 C
Munich
Saturday, February 28, 2026

ग्रीनलैंड मामले पर डेनमार्क ने मांगा भारत का सपोर्ट, ट्रंप पर बरसते हए कहा- ‘हमें अमेरिका से खतरा है’

Must read

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकियों के बाद डेनमार्क ने भारत से समर्थन की अपील की है। डेनिश सांसद रास्मस जारलोव ने कहा कि अमेरिका का जबरन कब्जे का दावा गलत है और चीन-रूस के खतरे का तर्क झूठा है। उन्होंने इसे वैश्विक संप्रभुता का मुद्दा बताया।कोपेनहेगन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड पर अपना दावा फिर से तेज कर दिया है, जिसके बाद डेनमार्क में हड़कंप मच गया है। बता दें कि ग्रीनलैंड आर्कटिक में स्थित एक स्ट्रैटेजिक आईलैंड है और यह डेनमार्क का सेमी-ऑटोनॉमस क्षेत्र है। यह पूरा इलाका दुर्लभ खनिज, यूरेनियम और आयरन जैसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हैं। ट्रंप ने 2019 में भी इस द्वीप को खरीदने की पेशकश की थी, लेकिन डेनमार्क ने साफ कह दिया था कि वह इसे किसी भी कीमत पर नहीं बेचेगा। ग्रीनलैंड को जबरन कब्जाने की धमकियों के बीच डेनमार्क के एक सांसद ने इस मामले में भारत का समर्थन मांगा है।
अगर डेनमार्क प्यार से माना तो ठीक, वरना…’
बता दें कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर फिर से दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है, और अगर जरूरत पड़ी तो सैन्य बल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ट्रंप ने कहा है कि अगर डेनमार्क प्यार से माना तो ठीक, वरना अमेरिका जबरन इस द्वीप पर कब्जा करेगा। डेनमार्क की रक्षा समिति के अध्यक्ष और सांसद रास्मस जारलोव ने ANI को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप प्रशासन के दावों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर संप्रभुता का दावा नहीं कर सकता।
‘उम्मीद करता हूं कि भारत भी हमारा साथ देगा’
जारलोव ने कहा, ‘ग्रीनलैंड भारत से बहुत दूर है, लेकिन यहां बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत दांव पर लगे हैं। क्या भारत यह स्वीकार करेगा कि कोई विदेशी ताकत उसके किसी इलाके पर सैन्य बल से या स्थानीय लोगों को रिश्वत देकर कब्जा करने की कोशिश करे? मुझे लगता है कि भारत ऐसी किसी भी हरकत से बहुत नाराज होगा, और हर देश को ऐसा ही होना चाहिए। इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि भारत भी हमारा साथ देगा, क्योंकि यह पूरी दुनिया के हित में है। अगर हम इसे नॉर्मल बना देंगे कि कोई किसी के भी इलाके पर कब्जा कर सकता है, तो दुनिया बहुत अराजक हो जाएगी।’
‘अमेरिका अपने सहयोगी देशों को धमकी दे रहा’
जारलोव ने वेनेजुएला की घटना का जिक्र करते हुए कहा, ‘अमेरिका ने नया तेवर अपना लिया है और अपने ही सहयोगी देशों को धमकी दे रहा है, जिन्होंने अमेरिका के खिलाफ कभी कुछ नहीं किया, बल्कि बहुत वफादार सहयोगी रहे हैं।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड पर कोई खतरा नहीं है, यहां किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और ट्रंप के हमले की कोई वजह नहीं है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका पहले से ही ग्रीनलैंड में सैन्य और अन्य तरीकों से पहुंच रखता है। वहां कोई ड्रग रूट नहीं है, कोई गैरकानूनी सरकार नहीं। कोई ऐतिहासिक मालिकाना हक नहीं, कोई समझौता भी नहीं टूटा, कुछ भी ऐसा नहीं है जो इसे जायज ठहराए।’
‘चीन के खतरे की बात झूठी, अमेरिका से खतरा’
जारलोव ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस दावे को खारिज किया कि ग्रीनलैंड रूस या चीन के मिसाइल हमलों से अमेरिका और दुनिया की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। जारलोव ने कहा, ‘ग्रीनलैंड पर कोई खतरा नहीं है। असली खतरा सिर्फ अमेरिका से है। चीन के खतरे की बात झूठी है। वहां चीन की कोई गतिविधि नहीं है, न कोई दूतावास, न खनन, न सैन्य मौजूदगी। ग्रीनलैंड में चाइनीज रेस्तरां ढूंढना भी मुश्किल है।’ उन्होंने तर्क दिया कि अगर वाकई खतरा होता तो अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपनी सेना 99 फीसदी कम नहीं की होती। पहले वहां 15,000 सैनिक थे, अब सिर्फ 150 रखे हैं। इससे साफ है कि रूस या चीन का कोई बड़ा खतरा नहीं है।’

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Latest article