-6.9 C
Munich
Friday, January 23, 2026

बिहार के वैशाली जिले विद्यालय का नाम है हरी प्रसाद थाना जिंदाहा से एक बेहद चिंताजनक

Must read

बिहार के वैशाली जिले विद्यालय का नाम है हरी प्रसाद थाना जिंदाहा से एक बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक दलित परिवार की बेटी का भविष्य विद्यालय की लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। सिंगेश्वर राम, जो अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, उनकी पुत्री प्रियांशु कुमारी वर्ष 2026 की वार्षिक माध्यमिक परीक्षा में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार थी। छात्रा नियमित श्रेणी की परीक्षार्थी है, उसकी जन्मतिथि 25 मई 2009 है और वह हाई स्कूल हरी, पोस्ट मुर्तुजापुर, वैशाली से पढ़ाई कर रही है।

प्रियांशु कुमारी का आधार नंबर, पंजीयन विवरण और अन्य शैक्षणिक अभिलेख पूरी तरह सही हैं। छात्रा का यूनिक आईडी भी जारी किया गया है और परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार उसके विषयों की तिथियां भी निर्धारित थीं। इसके बावजूद अब परीक्षा के समय यह सामने आया है कि विद्यालय स्तर पर छात्रा का परीक्षा फॉर्म समय पर सही ढंग से भरा ही नहीं गया। नतीजा यह हुआ कि छात्रा परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के बावजूद परीक्षा में बैठने से वंचित रह गई।

परिवार का आरोप है कि उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से कई बार संपर्क किया था और समय रहते सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे। इसके बाद भी विद्यालय प्रशासन ने न तो सही मार्गदर्शन दिया और न ही यह स्पष्ट किया कि फॉर्म भरने में कोई त्रुटि रह गई है। परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण मोड़ पर जब छात्रा को परीक्षा से रोका गया तो पूरा परिवार सदमे में आ गया।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह मामला एक दलित परिवार से जुड़ा हुआ है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सूचना दी जाती तो सुधार संभव था, लेकिन जानबूझकर या घोर लापरवाही के कारण एक होनहार छात्रा का एक साल बर्बाद होने की स्थिति बन गई है। छात्रा मानसिक रूप से टूट चुकी है और पूरे परिवार में आक्रोश का माहौल है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रवेश पत्र, यूनिक आईडी और परीक्षा कार्यक्रम तक मौजूद था, तो आखिर परीक्षा से कैसे वंचित किया गया। यह सीधे तौर पर विद्यालय प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

अब परिवार ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी विद्यालय कर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो और छात्रा प्रियांशु कुमारी को विशेष अवसर देकर परीक्षा में शामिल होने का अधिकार दिया जाए। यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो यह मामला बड़े आंदोलन और कानूनी कार्रवाई का रूप भी ले सकता है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि शिक्षा व्यवस्था की छोटी सी लापरवाही किस तरह एक छात्र के सपनों और भविष्य को अंधेरे में धकेल सकती है, खासकर तब जब पीड़ित समाज के कमजोर वर्ग से हो।

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Latest article