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Wednesday, February 11, 2026

टाटा मेमोरियल अस्पताल से लापता हुआ कैंसर मरीज, CCTV में बड़ेला की ओर जाते दिखे अरुण कुमार डे; परिवार ने जारी किए संपर्क नंबर

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मुंबई। देश के प्रतिष्ठित टाटा मेमोरियल अस्पताल से इलाज करा रहे ओडिशा के एक कैंसर मरीज के अचानक लापता हो जाने से हड़कंप मच गया है। राय बनिया थाना क्षेत्र, ओडिशा निवासी 47 वर्षीय अरुण कुमार डे 10 जनवरी की शाम करीब 4:08 बजे अस्पताल परिसर से बाहर निकलते हुए सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए हैं। इसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और परिजन लगातार उनकी तलाश में जुटे हैं।

जानकारी के अनुसार अरुण कुमार डे पिछले करीब एक वर्ष से टाटा मेमोरियल अस्पताल में कैंसर का इलाज करा रहे थे। घटना के दिन उनके भाई उमर कुमार ओपीडी में रिपोर्ट का इंतजार कर रहे थे, जबकि उनकी पत्नी कविता डॉक्टर से परामर्श लेने गई थीं। इसी दौरान अरुण कुमार डे अचानक अपनी सीट से उठे और बिना किसी को बताए अस्पताल से बाहर निकल गए। जब कुछ देर बाद परिजनों ने उन्हें तलाशना शुरू किया तो वे कहीं नजर नहीं आए।

अस्पताल प्रशासन द्वारा खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज में अरुण कुमार डे को अस्पताल से बाहर निकलकर बड़ेला की दिशा में जाते हुए देखा गया है। इसके बाद उनकी कोई स्पष्ट लोकेशन सामने नहीं आई है। परिजनों का कहना है कि अरुण कुमार डे की मानसिक स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है। वे हिंदी बोल तो लेते हैं, लेकिन ठीक से समझ नहीं पाते और अपना नाम-पता या पूरा एड्रेस स्पष्ट रूप से नहीं बता पाते। ऐसे में उनके भटक जाने की आशंका और गहरा गई है।

परिवार ने स्थानीय पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पुलिस ने फोटो और आवश्यक विवरण दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। महानगर जैसी भीड़भाड़ वाली जगह में एक बीमार और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति का इस तरह लापता हो जाना गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

परिजनों ने आम नागरिकों से भावुक अपील की है कि यदि किसी को भी अरुण कुमार डे के बारे में कोई जानकारी मिले, वे कहीं दिखाई दें या किसी को उनके बारे में कोई सुराग मिले, तो तुरंत नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सूचना दें—

9668750667
9348314138
7381576501
9820887383

एक साल से जिंदगी की जंग लड़ रहे अरुण कुमार डे के इस तरह गायब हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हर गुजरता पल उनकी चिंता और बेचैनी बढ़ा रहा है। परिजन और प्रशासन अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि किसी की सतर्कता और एक फोन कॉल से अरुण कुमार डे सुरक्षित अपने परिवार तक लौ

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