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Tuesday, February 17, 2026

बदायूं में जांच पर गहराया विवाद, महिला ने पति-ससुराल पर गंभीर आरोप लगाए; 5 वर्षीय बेटे की वैधता पर भी उठे सवाल

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बदायूं।
जनपद बदायूं के उसावा थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद का मामला अब नए आरोपों के साथ और गंभीर होता जा रहा है। ग्राम पचदेवरा दीवान नगर, पोस्ट उसावा, तहसील दातागंज निवासी सुमन देवी ने अपनी पूर्व शिकायत में पुनः तथ्यों को जोड़ते हुए पति व ससुराल पक्ष पर संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सुमन देवी का कहना है कि उनके पांच वर्षीय बेटे ध्रुव प्रताप की वैधता पर भी ससुराल पक्ष द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि पति देशराज सिंह कथित रूप से यह कहता है कि वह जमीन में कोई हिस्सा नहीं देगा, जबकि सास देवकी देवी द्वारा यह तक कहा गया कि बच्चा उनका नहीं है। इस आरोप से आहत सुमन देवी का कहना है कि उन्होंने विवाह के बाद अपने पति के अलावा किसी अन्य पुरुष से संबंध तक नहीं रखा और ध्रुव प्रताप उन्हीं का पुत्र है।

पीड़िता के अनुसार बेटे के जन्म के बाद से ही वह अधिकतर समय अपने मायके में रह रही हैं। बीच में करीब चार महीने के लिए ससुराल लौटीं, यह सोचकर कि शायद पति का व्यवहार बदल जाएगा, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका आरोप है कि दोबारा मारपीट कर उन्हें घर से निकाल दिया गया।

सुमन देवी ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके पति देशराज सिंह अपनी भाभी शारदा देवी के साथ रहने की बात कहते हैं और उन्हीं के यहां काम करते हैं। उनका कहना है कि पति न तो कोई आर्थिक सहयोग देते हैं और न ही बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। जब बच्चे का स्कूल में एडमिशन कराने की बात की गई तो कथित रूप से पति ने साफ इनकार कर दिया।

इससे पहले सुमन देवी ने संदर्भ संख्या 40014925051832 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने जांच अधिकारी पर बिना गवाहों से पूछताछ किए आख्या लगाने का आरोप लगाया था। अब नए आरोपों के साथ मामला और संवेदनशील हो गया है। पीड़िता का कहना है कि यह केवल पति-पत्नी का विवाद नहीं, बल्कि उनके सम्मान, बेटे के भविष्य और वैवाहिक अधिकारों का प्रश्न है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल पारिवारिक प्रताड़ना, बल्कि एक मासूम बच्चे के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला भी हो सकता है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर क्या निष्कर्ष सामने लाते हैं।

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