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Wednesday, April 1, 2026

150 करोड़ की अवैध संपत्ति और टैक्स चोरी का आरोप: नगर निगम की जमीन घेरने का दावा, पीड़ित बोला—पूर्व विधायकों की मिलीभगत से चल रहा खेल

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मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में कथित रूप से अवैध संपत्ति, टैक्स चोरी और सरकारी जमीन पर कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि शहर के कुछ प्रभावशाली लोगों ने नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है और वर्षों से बड़े पैमाने पर कर चोरी कर अवैध संपत्ति अर्जित की है। पीड़ित का कहना है कि वह पिछले करीब दस वर्षों से विभिन्न विभागों में शिकायत कर रहा है, लेकिन अब तक कहीं भी कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है।

जानकारी के अनुसार मुरादाबाद के थाना कटघर क्षेत्र स्थित रहमत नगर निवासी मोहम्मद वसीम पुत्र मोहम्मद रईस ने आयकर विभाग को दिए अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि हाजी नफीस पुत्र मेहदी हसन और इमरान पुत्र हाजी नफीस ने कथित रूप से बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार के जरिए करीब 150 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली है। पीड़ित का दावा है कि यह संपत्ति टैक्स चोरी और अन्य अवैध तरीकों से जुटाई गई है।

मोहम्मद वसीम के मुताबिक आरोपितों ने आयकर और जीएसटी से बचने के लिए कई संपत्तियां अपने रिश्तेदारों और अन्य लोगों के नाम पर खरीद रखी हैं। उनका कहना है कि अवैध कमाई को छिपाने के लिए कई तरह के तरीके अपनाए गए हैं, जिससे सरकारी विभागों को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि नगर निगम की जमीन को भी घेरकर उस पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत होने का भी संदेह है। वसीम का आरोप है कि पटवारी और अन्य लोगों की मदद से सरकारी जमीन को घेरकर निजी उपयोग में लिया जा रहा है।

मोहम्मद वसीम ने मीडिया से बातचीत में यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कुछ राजनीतिक लोगों का भी संरक्षण मिल रहा है। उनका कहना है कि पूर्व सभा के विधायक हाजी राम कुरैशी और पूर्व विधायक हाजी ईशुभ अंसारी की कथित मिलीभगत के कारण ही आरोपित लोगों के हौसले बुलंद हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय, आयकर विभाग और अन्य संबंधित विभागों में कई बार लिखित शिकायत दी है। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि करीब दस वर्षों से वह न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

पीड़ित ने आयकर विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कराई जाए तो टैक्स चोरी और अवैध संपत्ति के बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है और नगर निगम की जमीन को भी अवैध कब्जे से मुक्त कराया जा सकता है।

पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भ्रष्टाचार और कर चोरी जैसे मामलों पर रोक लग सके और उन्हें न्याय मिल सके।

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