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Tuesday, May 5, 2026

गाटा नंबर बदलने का आरोप, जमीन विवाद में नया मोड़: आवेदक बोला– पुलिस मिली हुई है, रिपोर्ट में गड़बड़ी

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आगरा। फतेहाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम नौगवां में जमीन विवाद अब और ज्यादा उलझता जा रहा है। फर्जी बैनामे के आरोपों के बीच अब आवेदक रामशंकर ने पुलिस जांच पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका दावा है कि पुलिस ने जांच के दौरान गाटा संख्या तक बदल दी और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

रामशंकर का कहना है कि वर्ष 2016, 2017 और 2018 में हुई कार्यवाही और रिपोर्ट में भारी गड़बड़ी की गई है। उनका आरोप है कि असली विवाद गाटा संख्या 216 से जुड़ा था, लेकिन पुलिस ने उसे बदलकर 125 कर दिया। इतना ही नहीं, गाटा संख्या 218, जो कथित तौर पर पोखर/तालाब की जमीन है, उसे रिकॉर्ड से “गुम” बताया गया। आवेदक का आरोप है कि इस तरह की हेराफेरी जानबूझकर की गई ताकि विपक्षी पक्ष को फायदा पहुंचाया जा सके।
विपक्षी मोबाइल नंबर 97589 51395,9012307943

उन्होंने यह भी कहा कि थाना स्तर पर 2023 से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उल्टा, पुलिसकर्मी गाटा नंबर बदलने और “कब्जा नहीं है” कहकर मामले को कमजोर करने में लगे हैं। रामशंकर ने साफ आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी विपक्षी लोगों से मिले हुए हैं और आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मामले की जड़ में खाता संख्या 125 की गाटा संख्या 217, रकबा 1.3080 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जो पहले महेंद्र पुत्र रत्ना के नाम दर्ज थी। आरोप है कि गांव के ही कुछ लोगों—जयवीर, मलखान सिंह, बल्लो और गिर्राज सिंह—ने फर्जी तरीके से बैनामा कराकर इस जमीन को अपने नाम करा लिया। इस संबंध में पहले भी धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।

हालांकि, पुलिस की ताजा जांच रिपोर्ट में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। जांच अधिकारी के मुताबिक, 2016 में दर्ज मुकदमे में 2017 में अंतिम रिपोर्ट कोर्ट भेज दी गई थी। साथ ही, “सन्तो देवी बनाम राजेन्द्र सिंह” नाम से एक दीवानी वाद अभी न्यायालय में लंबित है, जिसकी सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को होनी है।

पुलिस का कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण थाना स्तर पर आगे कोई कार्रवाई जरूरी नहीं है। लेकिन आवेदक के लगातार आरोपों और गाटा नंबर बदलने जैसी बातों ने पूरे प्रकरण को संदिग्ध बना दिया है। गांव में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं और अब सभी की नजर कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।

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