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Saturday, May 23, 2026

पति की मौत के 11 महीने बाद विधवा को संपत्ति से बेदखल करने की साजिश! 70 लाख की जमीन हड़पने का आरोप, ससुराल पक्ष तीन दिनों से फरार

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जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पति की मौत के बाद एक विधवा महिला को उसके ही ससुराल वालों द्वारा कथित तौर पर घर और जमीन से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। पीड़िता सीताबाई ने आरोप लगाया है कि उसके पति स्वर्गीय मनोज ठाकुर के निधन के बाद से ही ससुराल पक्ष की नीयत बदल गई और अब उसे तथा उसके मासूम बेटे देवांश को पैतृक संपत्ति से वंचित किया जा रहा है।

पीड़िता के अनुसार उसका निवास 468/2005 दीक्षितपुरा, राम मंदिर के बाजू में, वार्ड 25 महात्मा गांधी वार्ड, जबलपुर में है। पति की मौत के बाद वह अपने बेटे के साथ उसी घर में रह रही थी, लेकिन तभी जेठ प्रहलाद, जेठानी कल्पना, शीला देवी, नंद दिव्या और दिव्या के पति बलराम ने कथित तौर पर जमीन बेचने की साजिश रच डाली। सीताबाई का आरोप है कि बिना किसी जानकारी के परिवार वालों ने करोड़ों की पैतृक जमीन का सौदा कर दिया और जब उसने विरोध किया तो उसे जबरन घर से उठाकर ले जाया गया।

महिला का कहना है कि आरोपियों ने दबाव बनाते हुए कहा कि “साइन कर दो नहीं तो जमीन भी चली जाएगी और तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा।” इसके बाद कथित तौर पर जबरदस्ती दस्तखत करवा लिए गए। पीड़िता का दावा है कि करीब 70 लाख रुपए की संपत्ति में से उसे केवल 11 से 12 लाख रुपए थमा दिए गए और बाकी हिस्से से साफ इनकार कर दिया गया।

सीताबाई ने यह भी आरोप लगाया कि अब जब वह अपने बेटे देवांश के भविष्य के लिए अपना वैधानिक हिस्सा मांग रही है तो उसे धमकाया जा रहा है। महिला का कहना है कि उसने कोतवाली थाने में कई बार शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “ससुराल वालों ने पुलिस में पैसे दे दिए हैं, इसलिए हमारी शिकायत दर्ज नहीं की जा रही।”

मामले में नया मोड़ तब आया जब आसपास के लोगों के हवाले से बताया गया कि आरोपित ससुराल पक्ष पिछले तीन दिनों से फरार चल रहा है। इससे पूरे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं सीताबाई लगातार प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रही है और कह रही है कि उसे और उसके बेटे को उनका कानूनी हक दिलाया जाए।

अब यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक विधवा और उसके मासूम बेटे को न्याय कब मिलेगा।

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