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Saturday, May 23, 2026

शिवहर में महिला ने ससुराल पक्ष पर लगाया प्रताड़ना का आरोप, बच्चों को लेकर मायके में शरण लेने को हुई मजबूर

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शिवहर। बिहार के शिवहर जिले से घरेलू प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। तरियानी थाना क्षेत्र के बेलहियों गांव की रहने वाली एक महिला ने अपने ही ससुराल पक्ष के कई लोगों पर गाली-गलौज, बदनाम करने, धमकी देने और गलत नीयत से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने ग्राम पंचायत की सरपंच से कार्रवाई की मांग की है।

पीड़िता किरण देवी पत्नी संजय साह, वार्ड नंबर 09, ग्राम बेलहियों थाना तरियानी जिला शिवहर की निवासी हैं। उन्होंने अपने आवेदन में बताया कि उनके पति डिमापुर में काम करते हैं और वह अपने दो बच्चों के साथ गांव में रहती हैं। पति के बाहर रहने का फायदा उठाकर ससुराल पक्ष के लोग लगातार उन्हें परेशान करते हैं।

महिला का आरोप है कि उनके देवर सर्वेश साह, देवरानी रूबी देवी, सास शांति देवी, सर्वेश शाह केदार साहब मंजू देवी जितेंद्रर सहित कई लोग 17 जुलाई 2025 को उनके दरवाजे पर पहुंचे और उन्हें गंदी-गंदी गालियां देने लगे। आरोप है कि सभी लोगों ने उन्हें चरित्रहीन बताते हुए गांव छोड़ने की धमकी दी।

पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने कहा कि अगर वह गांव छोड़कर नहीं गईं तो ओझा-भगता के जरिए उन्हें पागल करवा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, महिला का दावा है कि उन्हें गलत काम करने का झूठा आरोप लगाकर बदनाम किया जा रहा है और बार-बार धमकियां दी जा रही हैं।

महिला ने बताया कि जब भी वह विरोध करती हैं तो मारपीट की धमकी दी जाती है। लगातार हो रही प्रताड़ना का असर उनके बच्चों पर भी पड़ा है। डर और तनाव के कारण बच्चों ने स्कूल जाना तक छोड़ दिया, जिसके बाद वह उन्हें अपने मायके में मां के पास छोड़ने को मजबूर हो गईं।

पीड़िता ने यह भी बताया कि जब उनके पति डिमापुर से घर लौटे और उन्होंने आरोपियों से इस व्यवहार का कारण पूछा तो उनके साथ भी गाली-गलौज की गई और मारपीट की धमकी दी गई। महिला का कहना है कि पूरा परिवार भय के साये में जी रहा है और कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है।

किरण देवी ने ग्राम पंचायत की सरपंच से मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में इस मामले को लेकर चर्चा का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पंचायत और प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो विवाद और बढ़ सकता है।

फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय और सुरक्षा की उम्मीद में प्रशासन और पंचायत की ओर देख रहा है।

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