गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में आए तेज आंधी-तूफान ने एक गरीब किसान और मजदूर परिवार की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। वर्षों की मेहनत से बनाया गया कच्चा आशियाना कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्दील हो गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घर पूरी तरह ढह जाने के बावजूद पीड़ित परिवार अब तक सरकारी आवास योजना के लाभ से वंचित है, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि गांव में कई ऐसे लोगों को आवास मिल चुका है जिनके घर पहले से सुरक्षित हैं।
मामला गाजीपुर जिले की तहसील कासिमाबाद के अंतर्गत थाना मोहम्मदाबाद क्षेत्र के ग्राम वासुदेवपुर का है। यहां रहने वाले सुरेंद्र राम पुत्र परीखान राम खेती और मजदूरी करके अपने पांच सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने टपरेनुमा कच्चा घर बनाकर किसी तरह परिवार के रहने की व्यवस्था कर रखी थी। यही घर उनके परिवार का एकमात्र सहारा था।
बुधवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। तेज हवाओं का दबाव इतना अधिक था कि देखते ही देखते घर की दीवारें और छत भरभराकर गिर गईं। परिवार के सदस्य किसी तरह समय रहते बाहर निकल आए, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि घर में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया और परिवार का सब कुछ लगभग बर्बाद हो गया।
घर गिरने के बाद सुरेंद्र राम का परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। बरसात के मौसम में बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि मजदूरी से होने वाली मामूली आय से दोबारा घर बनवाना उनके लिए संभव नहीं है।
सुरेंद्र राम ने बताया कि गांव में इस समय प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 से 30 आवास स्वीकृत हुए हैं, लेकिन उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया। उनका आरोप है कि जिन लोगों के पास पहले से रहने योग्य मकान हैं, उन्हें भी योजना का लाभ मिला है, जबकि उनका घर पूरी तरह ढह चुका है और फिर भी उन्हें आवास नहीं दिया गया।
ग्रामीणों का भी कहना है कि सुरेंद्र राम का परिवार लंबे समय से आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। प्राकृतिक आपदा के बाद उनकी स्थिति और दयनीय हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए, पीड़ित परिवार को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए और सरकारी आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर उन्हें आवास स्वीकृत किया जाए।
बताया जा रहा है कि वर्तमान में ग्राम प्रधान धर्मेंद्र सिंह हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने पंचायत और जिला प्रशासन से भी सवाल उठाए हैं कि आखिर पूरी तरह बेघर हो चुके परिवार को अब तक योजना का लाभ क्यों नहीं मिला।
फिलहाल सुरेंद्र राम, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। अब पीड़ित परिवार की निगाहें जिला प्रशासन और सरकार की ओर टिकी हैं कि कब उन्हें राहत मिलेगी और कब उनके सिर पर फिर से एक सुरक्षित छत नसीब होगी।
पीड़ित का विवरण
नाम – सुरेंद्र राम पुत्र परीखान राम
ग्राम – वासुदेवपुर
पोस्ट – वासुदेवपुर
थाना – मोहम्मदाबाद
तहसील – कासिमाबाद
ब्लॉक – कासिमाबाद
जिला – गाजीपुर, उत्तर प्रदेश – 233222
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गांव में आवास योजना के तहत दर्जनों लाभार्थियों का चयन हो चुका है, तब पूरी तरह बेघर हो चुके इस गरीब किसान परिवार को आखिर किस आधार पर योजना से बाहर रखा गया। यह सवाल गांव से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
