मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन किया गया। इस प्रक्रिया में 75 घर तोड़े गए हैं। ऐसे में बेघर हुए लोगों का गुस्सा फूट रहा है।
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने माननीय हाईकोर्ट के निर्देश पर एक बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गोला का मंदिर इलाके में स्थित नारायण विहार कॉलोनी में प्रशासनिक अमले ने बुलडोजर चलाकर लगभग 75 मकानों को जमींदोज कर दिया। इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से पूरी कॉलोनी में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। कार्रवाई के दौरान महिलाओं और पुरुषों ने जमकर हंगामा किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से उनकी तीखी बहस भी हुई। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।याचिकाकर्ता पर कोर्ट को गुमराह करने और राजनीतिक रसूख का आरोप
बेघर हुए पीड़ित लोगों ने इस कार्रवाई के पीछे एक गहरी साजिश का आरोप लगाया है। स्थानीय निवासी विनोद भदौरिया, छोटू तोमर, पवन पीड़ित और राकेश तोमर आदि का कहना है कि वे कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन याचिकाकर्ता नरेश अग्रवाल ने हाईकोर्ट को गुमराह कर यह आदेश हासिल किया है। निवासियों के मुताबिक, उद्योग विभाग ने सालों पहले नरेश अग्रवाल को व्यापार के लिए यहां जमीन लीज पर दी थी। यह पूरा विवाद उसी जमीन के एप्रोच रोड को लेकर है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहुंच मार्ग पहले से ही 60 फीट चौड़ा है, जो कहीं-कहीं थोड़ा कम हो सकता है। इसके बावजूद, याचिकाकर्ता जानबूझकर इस पूरी जगह को खाली करवाना चाहता है ताकि वह इस सरकारी जमीन को भी अपने कब्जे में ले सके।
प्रशासन की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दबाव पर उठाए सवाल
नारायण विहार के निवासियों ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता नरेश अग्रवाल उद्योग विभाग से मिली लीज की जमीन पर अवैध व्यापार कर रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस और खुद उद्योग विभाग को इस सच्चाई की पूरी जानकारी है, लेकिन नरेश अग्रवाल के मजबूत राजनीतिक रसूख और आर्थिक दबदबे के कारण उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। स्थानीय लोगों ने रुआंसे होकर कहा कि वे यहाँ पिछले 20 से 25 सालों से निवास कर रहे हैं, तब प्रशासन को कभी यह अतिक्रमण नजर नहीं आया। आज सिर्फ एक रसूखदार और पैसे वाले व्यक्ति के दबाव में आकर गरीबों के आशियाने उजाड़ दिए गए। यहाँ रहने वाले अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं, जिनके पास अब रहने को कोई जगह नहीं बची है।
न्यायालय का आदेश था, पहले ही दिया था समय: एसडीएम
दूसरी तरफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे एसडीएम नरेंद्र बाबू यादव ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि यहाँ निवासरत लोगों को अचानक नहीं हटाया गया है, बल्कि उन्हें बहुत पहले ही नोटिस देकर सूचित कर दिया गया था और मकान खाली करने का पर्याप्त समय भी दिया गया था। एसडीएम के अनुसार मौके पर लोगों को समझाइश दी गई और शांतिपूर्ण तरीके से अतिक्रमण हटाया गया। इस कार्रवाई की अंतिम रिपोर्ट अब माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि स्थानीय निवासियों को अपनी बात कहनी है तो वे न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
नेताओं के खिलाफ फूटा गुस्सा, चुनाव बहिष्कार का ऐलान
बुलडोजर की इस कार्रवाई से गुस्साए लोगों ने मौके पर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अपना आशियाना उजड़ता देख बेघर हुए लोगों का दर्द सरकार और राजनीतिक दलों के प्रति गुस्से में बदल गया। पीड़ितों का कहना है कि जब आज उनके सिर से छत छीनी जा रही थी और उनके बच्चे सड़क पर आ गए, तब उनकी मदद के लिए कोई भी जनप्रतिनिधि या नेता आगे नहीं आया। आक्रोशित निवासियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि आने वाले समय में वे किसी भी राजनीतिक दल के नेता को वोट नहीं देंगे और चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
