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Tuesday, June 30, 2026

गरीबी से जंग, सोशल मीडिया से उम्मीद, 18 वर्षीय रिम्मी कुमारी की संघर्षगाथा जीत रही दिल

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पूर्णिया।

बिहार के पूर्णिया जिले के बलुआ कचहरी की रहने वाली 18 वर्षीय रिम्मी कुमारी आज अपनी मेहनत, लगन और बुलंद हौसलों के दम पर सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं। बचपन में ही पिता सरोज मंडल का साया सिर से उठ जाने के बाद जिंदगी ने उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियों और कठिनाइयों का सामना करना सिखा दिया। आर्थिक तंगी के बीच पली-बढ़ी रिम्मी ने हालात के आगे हार मानने के बजाय अपने सपनों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।

रिम्मी कुमारी अपनी बड़ी बहन खुशबू राज, छोटे भाई और बहनों के साथ रहती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। कई बार घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया को अपनी मेहनत और प्रतिभा दिखाने का माध्यम बनाया और इसी रास्ते अपने परिवार की तकदीर बदलने का सपना संजोया।

करीब पांच महीने पहले रिम्मी कुमारी ने यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाना शुरू किया। यूट्यूब पर उनकी पहचान “Chhoti Kumari” नाम से है, जहां वह लगातार नए वीडियो अपलोड कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद वह पूरे समर्पण के साथ कंटेंट तैयार करती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने का प्रयास करती हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल लोकप्रिय होना नहीं बल्कि अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और आत्मनिर्भर बनना है।

रिम्मी के इस सफर में उनकी बड़ी बहन खुशबू राज हर कदम पर उनके साथ खड़ी हैं। वीडियो बनाने से लेकर उनका हौसला बढ़ाने तक दोनों बहनें एक-दूसरे की ताकत बनी हुई हैं। दोनों का सपना है कि एक दिन उनकी मेहनत रंग लाए और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें ऐसी पहचान मिले जिससे पूरे परिवार का भविष्य बदल सके।

रिम्मी कुमारी का मानना है कि सफलता किसी शॉर्टकट से नहीं मिलती, बल्कि लगातार मेहनत, धैर्य और सीखने की इच्छा से हासिल होती है। यही सोच उन्हें हर दिन नए वीडियो बनाने और खुद को पहले से बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करती है। उनका विश्वास है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि इंसान हार न माने तो मंजिल एक दिन जरूर मिलती है।

आज जब सोशल मीडिया को अधिकतर लोग केवल मनोरंजन का साधन मानते हैं, वहीं रिम्मी कुमारी ने इसे अपने परिवार की उम्मीद, अपने सपनों की उड़ान और आत्मनिर्भर बनने का जरिया बना लिया है। पिता की कमी, आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के बोझ के बावजूद उनके हौसले कभी कमजोर नहीं पड़े।

रिम्मी कुमारी की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जिंदा रखे हुए हैं। यदि उनका यही जुनून, मेहनत और संघर्ष जारी रहा तो वह आने वाले समय में सोशल मीडिया की दुनिया में एक मजबूत पहचान बनाने के साथ-साथ यह भी साबित करेंगी कि हालात चाहे कितने भी कठिन हों, मजबूत इरादों के सामने एक दिन उन्हें झुकना ही पड़ता है।

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