ओडिशा के नबरंगपुर में आशा दीदी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मात्र 5 बच्चों को पोलियो की दवा देने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर के पहुंचीं। उनके इस साहस की प्रशंसा हो रही है।
ओडिशा के नबरंगपुर जिले से समर्पण, साहस और जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां दो महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना एक दूर-दराज़ गांव तक पहुंचकर पांच बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई। उनका यह प्रयास अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला नबरंगपुर जिले के तेंतुलीखुंटी ब्लॉक के मंचागांव पंचायत के नुआ-ढेपागुड़ा गांव का है। यह गांव इंद्रावती जलाशय के दूसरी ओर स्थित है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गांव तक पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं है। यहां आने-जाने का एकमात्र साधन नाव है। बरसात के मौसम में जलाशय का पानी बढ़ जाने से यह सफर और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है। सरकार की ओर से चलाए जा रहे पोलियो टीकाकरण अभियान के तहत इस गांव के पांच बच्चों को पोलियो की खुराक पिलानी थी। ऐसे में आशा कार्यकर्ता द्रौपदी जानी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तिल सांता ने बिना किसी हिचकिचाहट के गांव जाने का फैसला किया। दोनों महिलाएं देशी नाव में बैठकर इंद्रावती जलाशय पार करने निकलीं। रास्ते में पानी का स्तर अधिक होने और तेज बहाव जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। बताया गया कि सफर के दौरान दोनों महिलाओं ने नाव चलाने में भी मदद की ताकि वे सुरक्षित गांव तक पहुंच सकें।
सभी बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई गई
काफी मुश्किल सफर के बाद दोनों स्वास्थ्य कर्मी नुआ-ढेपागुड़ा गांव पहुंचीं। वहां उन्होंने सभी पांच बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे। इसके बाद वे सुरक्षित वापस लौटीं। उनका यह पूरा सफर कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोग दोनों महिला कर्मियों के साहस और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर सराहना कर रहे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उनका अपने काम के प्रति समर्पण लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।
महिलाकर्मियों की प्रशंसा हुई
नबरंगपुर के अतिरिक्त जिला जनस्वास्थ्य अधिकारी मलय कुमार त्रिपाठी ने भी दोनों महिला कर्मियों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने यह साबित कर दिया है कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से बढ़कर उनके लिए कुछ भी नहीं है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे, चाहे वह कितना भी दूर या दुर्गम इलाके में क्यों न रहता हो। उन्होंने दोनों महिला कर्मियों के साहस और सेवा भावना को पूरे स्वास्थ्य विभाग के लिए प्रेरणादायक बताया।
