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Monday, January 19, 2026

भारतीय टीम से बाहर चल रहे खिलाड़ी को अचानक मिली कप्तानी, ऋषभ पंत चोटिल और आयुष बदोनी की टीम इंडिया में एंट्री

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यह सुविधा किस तारीख़ से लागू होगी, इसे लेकर एयरलाइंस और ट्रैवल इंडस्ट्री अब भी आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार कर रही हैं। इस फैसले के लागू होते ही भारतीय यात्री लुफ्थांसा की उड़ानों के ज़रिये जर्मनी होकर भारत और यूके के बीच बिना किसी शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा के यात्रा कर सकेंगे।भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों को ट्रांजिट के दौरान वीज़ा-फ्री यात्रा की अनुमति देने की घोषणा कर दी है। यह घोषणा जर्मनी के चांसलर फ़्रेडरिक मर्ज़ की आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान की गई। हालांकि, यह सुविधा किस तारीख़ से लागू होगी, इसे लेकर एयरलाइंस और ट्रैवल इंडस्ट्री अब भी आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार कर रही हैं। इस फैसले के लागू होते ही भारतीय यात्री लुफ्थांसा की उड़ानों के ज़रिये जर्मनी होकर भारत और यूके के बीच यात्रा कर सकेंगे, बिना किसी शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा के। इससे न सिर्फ़ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि एयर इंडिया को भी लुफ्थांसा के साथ यूके रूट पर कोड-शेयरिंग का मौका मिलेगा, जिससे जर्मनी जाने वाली उसकी उड़ानों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
वीजा फ्री ट्रांजिट का मतलब
वीज़ा-फ्री ट्रांजिट का मतलब यह है कि किसी देश से होकर केवल कनेक्टिंग फ्लाइट लेने के लिए यात्रियों को उस देश का ट्रांजिट वीज़ा लेने की आवश्यकता नहीं होती। इस दौरान यात्री एयरपोर्ट के ट्रांजिट एरिया तक ही सीमित रहते हैं और इमिग्रेशन काउंटर से बाहर नहीं जा सकते। उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, बल्कि वे केवल अगली उड़ान पकड़ने के उद्देश्य से एयरपोर्ट पर ठहरते हैं। इसके अलावा, शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा का मतलब है कि किसी ऐसे यात्री को दिया जाने वाला परमिट, जो शेंगेन क्षेत्र के किसी देश के एयरपोर्ट से केवल ट्रांजिट (कनेक्टिंग फ्लाइट) करना चाहता है।

यात्रियों पर पड़े प्रभाव होंगे कम
timesofindia की खबर के मुताबिक, सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी के ज़रिये ट्रांजिट को वीज़ा-फ्री बनाने का निर्णय लिया गया है, जो चांसलर की भारत यात्रा के 27 अहम नतीजों में शामिल है। यह कदम ब्रेक्ज़िट के बाद भारतीय और अन्य विदेशी यात्रियों पर पड़े प्रभाव को आंशिक रूप से कम करेगा। ब्रेक्ज़िट के बाद यूके और यूरोपीय संघ ने एक-दूसरे के ज़रिये यात्रा करने पर ट्रांजिट वीज़ा अनिवार्य कर दिया था। इसका नतीजा यह हुआ था कि दिल्ली से फ्रैंकफर्ट होते हुए लंदन जाने वाले भारतीय यात्रियों को शेंगेन ट्रांजिट वीजा लेना पड़ता था, जबकि मुंबई से लंदन के रास्ते म्यूनिख जाने के लिए यूके ट्रांजिट वीजा जरूरी था।
यात्रियों को सावधानीपूर्वक टिकट बुक करने की सलाह
यूके, लुफ्थांसा और एयर इंडिया-दोनों के लिए एक अहम बाजार है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद लुफ्थांसा अपने जर्मन हब्स के ज़रिये भारत से यूके जाने वाले यात्रियों को फिर से बड़े पैमाने पर सेवा दे सकेगी, जिनमें एयर इंडिया के कोड-शेयर यात्री भी शामिल होंगे। साथ ही जर्मनी के रास्ते भारतीय यात्रियों के लिए कुछ अन्य वीज़ा-फ्री गंतव्य, जैसे कैरिबियन देश, भी अधिक सुलभ हो जाएंगे। हालांकि, यात्रियों को टिकट बुक करते समय ट्रांजिट वीज़ा से जुड़े नियमों की सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है।

भारतीय यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा कहीं अधिक आसान होगी
कई मामलों में केवल कम किराए के आधार पर की गई बुकिंग बाद में वीज़ा न होने के कारण रद्द करनी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर, भारत से अमेरिका की यात्रा अगर केवल ट्रांजिट के लिए भी अमेरिका से होकर हो, तो अमेरिकी वीज़ा अनिवार्य है। इसी तरह, भारत से अमेरिका कनाडा के रास्ते जाने पर कनाडा का ट्रांजिट वीज़ा जरूरी होता है। जल्द ही जर्मनी भारत–यूके यात्रा के लिए एक अहम अपवाद के तौर पर उभरेगा, जिससे भारतीय यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा कहीं अधिक आसान और सुगम हो जाएगी।

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