बड़वानी (मध्य प्रदेश)।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। तहसील पानसेमल के छोटा मलगांव निवासी 13 वर्षीय नाबालिग लड़की अनीता के साथ 13 दिसंबर 2025 की रात करीब 10:30 बजे कथित रूप से मारपीट, जबरन शारीरिक शोषण और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि इस जघन्य वारदात के बाद आरोपी लड़की को जबरदस्ती महाराष्ट्र ले गया, जिससे उसकी जान और भविष्य दोनों खतरे में पड़ गए।
शिकायतकर्ता शेवता रजान पाटी द्वारा जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बड़वानी को सौंपे गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, आरोपी लिल्या मेंनटा भोसले, निवासी बारी फोल्या पाटी पोस्ट बकराटा, तहसील पाड़ी और उसका साथी कुंवर सिंह, निवासी सुनाभाटी, ने मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया। आरोप है कि घटना कुंवर सिंह के घर पर रात 10:30 बजे हुई। पीड़िता चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन डर के कारण कोई आगे नहीं आया। बाद में उसे धमकी दी गई कि अगर किसी को बताया तो जंगल में मारकर फेंक दिया जाएगा।
परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद वे खेतिया थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया। कभी “शाम को आना” तो कभी “सोमवार को आना” कहकर टाल दिया गया। अब घटना को 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो FIR दर्ज हुई और न ही किसी आरोपी से पूछताछ हुई।
पीड़ित परिवार का दावा है कि आरोपी लिल्या मेनटा भोसले ने पुलिस को रिश्वत देकर पूरे मामले को दबा दिया। जब परिवार ने लगातार न्याय की मांग की, तो उल्टा पुलिस ने पीड़ितों पर ही कार्रवाई शुरू कर दी। आरोप है कि कुछ दिन पहले पुलिस ने शेवता रजान पाडवी की मां फूगी बाई, भाई और तीन अन्य परिजनों के साथ थाने में बेरहमी से मारपीट की।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि दिलीप रजान पाडवी को पुलिस थाने ले जाकर लोहे की रॉड से पीटा गया, जिससे उसके सिर में आठ टांके लगाने पड़े। इसके अलावा चार अन्य लोगों को भी थाने ले जाकर बुरी तरह पीटा गया। परिवार का कहना है कि पुलिसिया अत्याचार के कारण बच्चों की पढ़ाई और भविष्य तबाह हो गया है।
पीड़ित परिवार के सदस्य शिक्षित हैं—किसी ने MSC, B.Ed, LLB, तो किसी ने BA, SYBA तक पढ़ाई की है। दिलीप पाडवी 12वीं साइंस का छात्र है, लेकिन पुलिस की मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के चलते उसकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। परिवार का कहना है कि अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और न्याय मांगने वालों को ही सजा दी जा रही है।
शिकायत में नाबालिग अनीता की जन्म तिथि और पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज है, जिससे साफ है कि वह कानूनन पूरी तरह संरक्षित श्रेणी में आती है। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी और देरी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। परिवार का कहना है कि हर गुजरते दिन के साथ सबूत मिटाए जा रहे हैं और लड़की की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है।
अब पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और राज्य सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो उन्हें कभी न्याय नहीं मिलेगा। यह मामला न सिर्फ पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि “बेटी बचाओ” जैसे नारों की सच्चाई भी उजागर करता है।
