संजय कपूर की संपत्ति से जुड़े मामले में जितनी सुनवाई आगे बढ़ रही है, उतने ही सवाल बढ़ते जा रहे हैं। क्या संजय कपूर की असली इच्छा कभी दर्ज की गई थी या यह वसीयत किसी और का खेल है? गुरुवार की नई गवाही ने इन संदेहों को और मजबूत कर दिया है।
गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई ने संजय कपूर की प्रॉपर्टी को लेकर चल रहे विवाद को और उलझा दिया। श्रद्धा सूरी मारवाह की वकील अनुराधा दत्त की दलीलों से अनजाने में ही प्रिया सचदेव कपूर द्वारा पेश की गई वसीयत की सच्चाई पर सवाल और बढ़ गए। सूरी लगातार अपने बयान और टाइमलाइन बदलती दिखीं, जिससे यह शक गहरा हो गया कि यह वसीयत शायद संजय कपूर की असली इच्छा को नहीं दर्शाती। खासतौर पर इसलिए क्योंकि इसमें उनके बच्चों समायरा और कियान का नाम तक शामिल नहीं है। सूरी ने पहले कहा कि उन्हें वसीयत प्रिया से मिली थी, लेकिन बाद में बताया कि 14 जून को ‘दिनेश अग्रवाल’ नामक व्यक्ति ने उन्हें ईमेल भेजा था जिसमें वसीयत लगी हुई थी और उन्हें एग्जीक्यूटर बनने को कहा गया था। इस ईमेल के साथ पहले गलती से ट्रस्ट डीड भेज दी गई थी और बाद में सही वसीयत। ऐसा पूरा घटनाक्रम बेहद अजीब और कानूनी रूप से संदिग्ध माना जा रहा है।
सूरी का दावा
सूरी ने यह भी माना कि उन्हें पता नहीं था कि वह एग्जीक्यूटर बनाई गई हैं, उनके पास कोई वकील नहीं था और वसीयत सही है या नहीं इस पर भी वह निश्चित नहीं थीं। इससे यह शक और बढ़ गया कि उन्हें यह दस्तावेज बाद में दिया गया, न कि संजय कपूर ने खुद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। दूसरी ओर प्रिया कपूर ने 24 जून को सूरी से कहा था कि यह संजय की आखिरी और एकमात्र वसीयत है, लेकिन बाद में कोर्ट में उन्होंने माना कि वह सिर्फ नॉमिनी हैं, मालिक नहीं। भारतीय कानून में नॉमिनी सिर्फ़ संपत्ति को संभालता है, वह मालिकाना हक नहीं रखता। यह विरोधाभास प्रिया के दावों को कमजोर करता है और पेश की गई वसीयत की मंशा पर और शक खड़ा करता है।
क्या है पूरा मामला?
अगर यह वसीयत अदालत में असली साबित नहीं हुई तो संजय कपूर की संपत्ति कानून के अनुसार सभी वारिसों खासतौर पर उनके बच्चों में बराबर बंट जाएगी। खुद सूरी की वकील ने कोर्ट में यह माना। सूरी ने प्रिया से हर्जाना भी मांगा, जो एक एग्जीक्यूटर का काम नहीं होता अगर उसे वसीयत पर भरोसा होता। यह भी दिखाता है कि उन्हें खुद इस दस्तावेज पर संदेह है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कभी वसीयत को प्रोबेट कराने की जरूरत नहीं लगी, जो दर्शाता है कि सही कानूनी प्रक्रिया शायद अपनाई ही नहीं गई। कुल मिलाकर, सूरी के बदलते बयान और प्रिया के सिर्फ नॉमिनी होने का खुलासा इस शक को मजबूत करता है कि यह वसीयत संजय कपूर की असली इच्छा नहीं बल्कि उनकी संपत्ति को उनके बच्चों से दूर रखने की एक कोशिश हो सकती है।
मौत के बाद खड़ा हुआ विवाद
इस मामले की पृष्ठभूमि में संजय कपूर जो 30000 करोड़ रुपये के बिजनेस एम्पायर के मालिक थे 12 जून 2025 को लंदन में कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। 47 दिन बाद उनकी तीसरी पत्नी प्रिया ने 21 मार्च 2025 की एक वसीयत पेश की जिसमें संजय की पूरी व्यक्तिगत संपत्ति उन्हीं को दी गई बताई गई है, जबकि उनकी दूसरी पत्नी करिश्मा कपूर, बच्चे समायरा और कियान, और माँ रानी कपूर को पूरी तरह बाहर रखा गया है। बच्चों के वकील महेश जेठमलानी ने बताया कि वसीयत में कई गंभीर गलतियां हैं, नाम गलत, सरनेम गलत, पते गलत, भाषा उलझी हुई और संजय को कई जगह वसीयत देने वाली कहा गया है। उनका कहना है कि हार्वर्ड-शिक्षित बिज़नेसमैन ऐसी ग़लतियों वाली वसीयत कभी मंज़ूर नहीं कर सकते।
