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Saturday, January 3, 2026

हो जाइए तैयार… टोल प्लाजा पर रुकने की नहीं पड़ेगी जरूरत! नितिन गडकरी ने कर दिया ये बड़ा ऐलान

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देश की सड़कों पर चलने वाले लाखों यात्रियों और ट्रक चालकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया कि अगले एक साल के भीतर टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

देश के रोड ट्रैफिक और हाईवे यातायात में बड़ा बदलाव आने वाला है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया कि अगले एक साल के अंदर पूरे देश में टोल टैक्स कलेक्शन का सिस्टम यानी बैरियर पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद यात्रियों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और टोल राशि पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिए कटेगी।

गडकरी ने बताया कि इस नए डिजिटल सिस्टम को पहले ही लगभग 10 स्थानों पर लागू किया जा चुका है। अगले एक साल में इसे पूरे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की 4500 राजमार्ग परियोजनाएं चल रही हैं और इस नए सिस्टम के साथ सड़क और परिवहन की गति और तेज होगी।

NETC और RFID तकनीक
नए डिजिटल टोल सिस्टम के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) तकनीक विकसित की है। इस सिस्टम में वाहन की विंडस्क्रीन पर RFID यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस लगाया जाएगा। जैसे ही वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है, इसका बैंक खाते से जुड़ा टोल ऑटोमैटिकली काट लिया जाएगा। इससे न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि टोल प्लाजा पर रुकने के कारण होने वाली समय की बर्बादी भी खत्म हो जाएगी।

पर्यावरण व ईंधन पहल
सड़क परिवहन के साथ-साथ गडकरी ने पर्यावरण और भविष्य के ईंधन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक ईंधन को प्राथमिकता दे रही है और हाईड्रोजन को भविष्य का ईंधन माना जा रहा है

कैशलेस इलाज योजना
नितिन गडकरी ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना की भी जानकारी दी। सड़क दुर्घटना के मामलों में अब 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज पीड़ित को उपलब्ध कराया जाएगा। अब तक कुल 6,833 अनुरोधों में से 5,480 पीड़ित इस योजना के तहत लाभान्वित हुए हैं।

सड़क यातायात में सुधार
इस नई डिजिटल टोल प्रणाली और कैशलेस इलाज योजना से न सिर्फ सड़क यातायात में सुधार होगा बल्कि यात्रियों और दुर्घटना पीड़ितों की जिंदगी भी आसान होगी। देश के हाईवे और परिवहन क्षेत्र में यह कदम एक तकनीकी क्रांति की तरह देखा जा रहा है।

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