विशेष संवाददाता कंचन की रिपोर्ट
कटिहार/मनिहारी। बिहार के कटिहार जिले के मनिहारी थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। राघोपुर निवासी मो. सगीर आलम ने आरोप लगाया है कि लीज पर संचालित उनके मोटर गैरेज में जमीन विवाद के चलते सुनियोजित तरीके से आग लगा दी गई, जिससे लगभग 75 लाख रुपये की गाड़ियां, मशीनें, स्पेयर पार्ट्स और अन्य सामान जलकर नष्ट हो गया। पीड़ित का कहना है कि घटना से पहले उन्हें लगातार जमीन खाली करने, दुकान हटाने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं। अब पीड़ित परिवार प्रशासन से निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
पीड़ित मो. सगीर आलम के अनुसार उन्होंने रसुलपुर-कुमारीपुर स्थित एनएच-131ए के किनारे जमीन को विधिवत लीज एग्रीमेंट के आधार पर लेकर “सगीर मोटर गैरेज एंड पार्ट्स” संचालित किया था। उनका दावा है कि गैरेज स्थापित करने के लिए उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर मिट्टी भराई, निर्माण कार्य और अन्य व्यवस्थाएं की थीं। उनका आरोप है कि समय बीतने के साथ जमीन की कीमत बढ़ने पर जमीन मालिक और उसके परिजन कथित रूप से लीज समाप्त कर जबरन कब्जा करने का दबाव बनाने लगे।
पीड़ित का आरोप है कि कई महीनों से उन्हें मोबाइल, व्हाट्सएप और आमने-सामने दुकान खाली करने की धमकियां दी जा रही थीं। उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत स्थानीय थाना, पुलिस अधिकारियों और प्रशासन के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से भी की गई थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि शिकायतों पर पहले कार्रवाई होती तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था।
मो. सगीर आलम का आरोप है कि 14 जुलाई 2026 की रात करीब 1:10 बजे उनके गैरेज में आग लगा दी गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे तथा काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक गैरेज में खड़ी बोलेरो पिकअप गाड़ियां, मोटरसाइकिलें, वेल्डिंग मशीनें, जनरेटर, इंजन, स्पेयर पार्ट्स, मोबिल, टायर, रिम, औजार सहित बड़ी मात्रा में रखा सामान पूरी तरह जल चुका था। पीड़ित ने कुल नुकसान लगभग 75 लाख रुपये बताया है।
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि इस मामले में जमीन मालिक शौकत अली तथा उनके पुत्र मो. तासिम, मो. नौरज उर्फ यासीन, मो. मुन्नु और मो. चुन्नु के खिलाफ पूर्व से भी धमकी और विवाद की शिकायतें की गई थीं। उनका कहना है कि घटना के बाद भी उन्होंने पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके परिवार को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे पूरा परिवार भय के साये में जीवन जीने को मजबूर है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि गैरेज ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन था और आगजनी के बाद उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। उनका आरोप है कि लाखों रुपये का नुकसान होने के बावजूद अभी तक दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आगजनी की वैज्ञानिक जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई हो तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
फिलहाल मामले को लेकर पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है। वहीं पुलिस और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
