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Tuesday, July 7, 2026

राँची में जमीन दाखिल-खारिज पर बड़ा विवाद: रजिस्ट्री के बाद भी नहीं मिला नामांतरण, अपील में अंचल अधिकारी का आदेश निरस्त, अब जमीन की मापी और सड़क दिखाने पर भी उठे गंभीर सवाल

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राँची।

झारखंड की राजधानी राँची के चान्हों अंचल में जमीन के दाखिल-खारिज को लेकर सामने आया एक मामला अब और भी गंभीर होता जा रहा है। पहले वैध रजिस्ट्री के बावजूद नामांतरण नहीं मिलने का विवाद सामने आया था, वहीं अब जमीन की मापी, सीमांकन और कथित अनियमितताओं को लेकर नए आरोप सामने आने से पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। आरोप हैं कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में गंभीर गड़बड़ियां हुईं, जिससे खरीदार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मामला राँची जिले के चान्हों अंचल अंतर्गत कंजगी मौजा का है। अपीलकर्ता देवकी देवी का कहना है कि उन्होंने 10 जनवरी 2025 को खाता संख्या 50, प्लॉट संख्या 643, रकबा 2.86 डिसमिल भूमि मनोज कुमार सिंह से विधिवत रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदी थी। उनका कहना है कि खरीद के बाद से वह उक्त भूमि पर शांतिपूर्वक काबिज हैं और उसी जमीन पर उनका आवास भी बना हुआ है।

दाखिल-खारिज के लिए आवेदन करने के बाद हल्का कर्मचारी द्वारा स्थल जांच की गई। इसके बाद मामला अंचल निरीक्षक के पास पहुंचा और लगान रसीद जारी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। लेकिन अंतिम चरण में नामांतरण की प्रक्रिया रोक दी गई। बाद में अंचल अधिकारी ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि भूमि खतियान में बकास्त मालिक के नाम दर्ज है तथा स्थानीय ग्रामीणों द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई है। जांच में भूमि को विवादित मानते हुए नामांतरण से इनकार कर दिया गया।

इस आदेश के खिलाफ देवकी देवी ने उप समाहर्ता भूमि सुधार, सदर राँची की अदालत में दाखिल-खारिज अपील वाद संख्या 541 आर15/2025-26 दायर की। अपील में कहा गया कि विक्रेता मनोज कुमार सिंह जमाबंदी रैयत के वैध उत्तराधिकारी हैं तथा पारिवारिक बंटवारे के बाद संबंधित भूमि उनके हिस्से में आई थी। आरोप लगाया गया कि बिना पर्याप्त अवसर दिए और उपलब्ध दस्तावेजों की समुचित जांच किए नामांतरण आवेदन खारिज कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान उप समाहर्ता भूमि सुधार ने उपलब्ध दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और दोनों पक्षों के तर्कों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अंचल अधिकारी द्वारा अपीलकर्ता को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया तथा प्रस्तुत दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की समुचित जांच भी नहीं की गई। इसके बाद 28 जुलाई 2025 को पारित आदेश में अंचल अधिकारी द्वारा 13 अप्रैल 2025 को पारित नामांतरण अस्वीकृति आदेश को निरस्त कर दिया गया। साथ ही निर्देश दिया गया कि सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर देते हुए दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और वास्तविक दखल-कब्जे की विस्तृत जांच के बाद नया आदेश पारित किया जाए।

इसी बीच मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि चान्हों अंचल अधिकारी संजीव कुमार ने 23 डिसमिल जमीन की मापी में अनियमितता करते हुए अमीन के साथ मिलकर कथित रूप से जमीन का रकबा 25 डिसमिल दर्शा दिया। इतना ही नहीं, आरोप यह भी लगाया गया है कि लगभग 21.25 डिसमिल भूमि में सड़क के लिए अतिरिक्त हिस्सा दिखाकर दूसरे पक्ष को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया, जबकि पूर्व के नक्शों और अभिलेखों में उस स्थान पर किसी सड़क का उल्लेख नहीं है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित भूमि की पहले दो बार सरकारी स्तर पर मापी हो चुकी है और दोनों बार करीब 23 डिसमिल भूमि ही पाई गई थी। इसके बावजूद नई मापी में अलग आंकड़े सामने आने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप यह भी है कि राजस्व अभिलेखों और वास्तविक स्थिति में अंतर पैदा कर विवाद को और जटिल बनाया गया।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। ऐसे में इन दावों की सत्यता सक्षम जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

इस पूरे मामले ने झारखंड में जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज, सीमांकन और राजस्व प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने विधिवत रजिस्ट्री के माध्यम से भूमि खरीदी है, तो नामांतरण संबंधी निर्णय पूरी जांच, सभी उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण और सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद ही किया जाना चाहिए। वहीं यदि मापी और सीमांकन में अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह राजस्व व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल ख…

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