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Tuesday, July 7, 2026

दो साल से बदहाल सड़क, नालियों का गंदा पानी बना मुसीबत, बीमारियों के डर में जी रहे ग्रामीण, प्रशासन पर अनदेखी के आरोप

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सोनीपत।

हरियाणा के सोनीपत जिले के बरोदा कैल्पा रोड गली है यहां पानी की कोई निकासी नहीं हो रही है पिछले करीब दो वर्षों से सड़क, नालियों और जल निकासी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित व मौखिक शिकायतें देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे पूरे क्षेत्र के लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है और उनमें प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव की मुख्य सड़क लंबे समय से पूरी तरह क्षतिग्रस्त पड़ी है। जगह-जगह बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिनमें नालियों का गंदा पानी जमा रहता है। सड़क पर जलभराव होने से लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं, जब पूरी सड़क तालाब जैसी दिखाई देने लगती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदा पानी लंबे समय तक जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जबकि कई बार लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पंचायत, संबंधित विभाग और प्रशासन के समक्ष कई बार समस्या उठाई, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले। दो वर्षों से हालात जस के तस बने हुए हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई देती है।

गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, टूटी हुई सड़क का शीघ्र निर्माण कराया जाए, नालियों की समुचित सफाई और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे संभावित बीमारियों पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो उन्हें मजबूर होकर लोकतांत्रिक तरीके से बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान कब तक हो पाता है।

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