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Thursday, July 9, 2026

वक्फ बोर्ड विवाद के बीच भोपाल के निकाह काजी का इस्तीफा, गैर-मुस्लिम नियुक्तियों पर जताई आपत्ति

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गैर मुसलमानों की नियुक्ति और वक्फ बोर्ड विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इसी वजह से भोपाल के निकाह काजी ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा गैर मुस्लिमों की नियुक्ति और बोर्ड का रवैया सही नहीं है।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विवाद बढ़ गया है। इस फैसले के विरोध में भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मुआज खान नुमानी नदवी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने निकाह काजी के पद के साथ-साथ दीनी तालीमी बोर्ड जमीअत उलमा, मध्य प्रदेश के महासचिव पद को भी त्याग दिया है और अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। काजी मुआज खान ने अपना पहला इस्तीफा शहर काजी मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी को और दूसरा इस्तीफा दीनी तालीमी बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अबुल कलाम क़ासिमी को भेजा। दोनों ही पत्रों में उन्होंने वक्फ बोर्ड की मौजूदा गतिविधियों और मुस्लिम नेतृत्व द्वारा उनके समर्थन किए जाने पर गहरी आपत्ति जताई है।
वक्फ बोर्ड पर काजी मुआज खान का बयान
अपने त्यागपत्र में काजी मुआज खान ने लिखा, ‘मुझे जो जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं… मैंने उन्हें पूरी निष्ठा से निभाया, लेकिन वक्फ बोर्ड के वर्तमान पदाधिकारियों के साथ संस्था के जिम्मेदार लोगों का तुष्टिकरण का जो रवैया सामने आया है। उसे स्वीकार करना मुमकिन नहीं है। बोर्ड की मौजूदा गतिविधियां कौम और इस्लाम विरोधी हैं, जो जाहिर है। ऐसे में मेरा इस्लामी आत्मसम्मान मुझे इस व्यवस्था से जुड़े रहने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने आगे कहा कि वे निजी तौर पर वरिष्ठों का सम्मान करते रहेंगे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इन पदों पर बने रहना उनके लिए संभव नहीं है।
मोहम्मद मसरूर ने गैर-मुस्लिम नियुक्तियों पर जताई आपत्ति
दूसरी ओर, मुफ्ती मोहम्मद मसरूर ने भी अपनी नाराजगी और आपत्ति जताई है। वायरल वीडियो के जरिए उन्होंने कहा, ‘वक्फ बोर्ड में 2 दिन पहले जो मंजर सामने आया। उसे देखकर दिल जल गया, किस तरह से हमारे बड़ों ने उसे शख्स का स्वागत किया उन्हें हार फूलों से नवाजा। उनके काम को दुआएं भी दी, जब कोई मस्जिद कमेटी के रिन्यूअल के लिए जाता है तो वो शख्श कहता कि भाजपा के नेता के पास जाओ दूसरा मामला है, जहां सुप्रीम कोर्ट में मामला चलने के बावजूद बोर्ड में दो हिंदू भाइयों को कमेटी में शामिल कर लिया जाता है। निहायत ही अफसोसनाक चीज है। हम इसको बिल्कुल पसंद नहीं करते यह दिल तोड़ने वाली चीज है। मैं मुस्लिम भाइयों से अपील करता हूं कि आप भी अपने बड़ों से सवाल करें कि ऐसा करना कहां तक सही है।’

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