मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित धनवंतरी नगर मेडिकल कॉलेज क्षेत्र की झुग्गी बस्ती में रहने वाले एक गरीब परिवार के साथ घर दिलाने के नाम पर कथित ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि आवास योजना के तहत मकान दिलाने का झांसा देकर उससे चरणबद्ध तरीके से हजारों रुपये वसूल लिए गए। अब पीड़ित परिवार प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपना पैसा वापस दिलाने की मांग कर रहा है।
जानकारी के अनुसार झुग्गी बस्ती में रहने वाली संगीता अपने पति और बच्चों के साथ बेहद साधारण परिस्थितियों में एक छोटे से टीन शेड में जीवन यापन कर रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका लंबे समय से सपना था कि उन्हें भी सरकारी आवास योजना के तहत एक पक्का घर मिल जाए।
पीड़िता के अनुसार कुछ दिन पहले उनके पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को आवास योजना से जुड़ा बताते हुए कहा कि यदि वह सरकारी योजना के तहत घर बनवाना चाहती हैं तो उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए एक हजार रुपये जमा करने की बात कही गई। घर मिलने की उम्मीद में संगीता ने बताए गए खाते में एक हजार रुपये भेज दिए।
संगीता ने यह जानकारी अपने आसपास के कुछ अन्य जरूरतमंद लोगों को भी दी, जिन्होंने भी मकान मिलने की उम्मीद में रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे जमा कर दिए।
आरोप है कि इसके बाद फोन करने वाले व्यक्ति ने दोबारा संपर्क कर कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के लिए चार हजार रुपये और जमा करने होंगे, अन्यथा रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा। घर मिलने की उम्मीद में संगीता ने चार हजार रुपये भी भेज दिए।
पीड़िता का कहना है कि कुछ समय बाद फिर से फोन आया और इस बार सात हजार रुपये की मांग की गई। कथित ठग ने धमकी देते हुए कहा कि यदि सात हजार रुपये जमा नहीं किए गए तो उनका आवेदन रद्द कर दिया जाएगा और उनका बैंक खाता भी ब्लॉक कर दिया जाएगा। इस तरह लगातार अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे पैसे मांगने का प्रयास किया गया।
घटना के बाद संगीता और उनका परिवार मानसिक रूप से परेशान है। उनका कहना है कि गरीब परिवार बड़ी मेहनत से पैसे जोड़ता है और इसी उम्मीद में रकम जमा कर देता है कि शायद उसे अपना घर मिल जाएगा, लेकिन ऐसे ठग उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई नहीं की गई तो कई अन्य गरीब परिवार भी इस तरह की ठगी का शिकार हो सकते हैं। लोगों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ठगी गई राशि वापस दिलाई जाए तथा आम जनता को इस प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी से सतर्क करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।
गरीबों को आवास दिलाने के नाम पर हो रही इस तरह की कथित ठगी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जरूरतमंद लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले साइबर ठगों पर प्रभावी अंकुश कब लगेगा। लोगों का कहना है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी बिचौलिए और बिना किसी अवैध वसूली के पहुंचे, इसके लिए प्रशासन को और अधिक सतर्क एवं सक्रिय होने की आवश्यकता है।
