मसाला-मिर्ची बेचकर परिवार पालने वाले सुनील का अनूठा पर्यावरण संदेश, पत्नी-बच्चे होने के बावजूद आम के पेड़ को देते हैं दुल्हन जैसा सम्मान; पेड़ों की कटाई रोकने और हर व्यक्ति को आम का पौधा लगाने के लिए कर रहे जागरूक*
*लुधियाना।* आमतौर पर लोग अपनी जिंदगी में शादी, परिवार और रिश्तों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं, लेकिन पंजाब के लुधियाना से एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान पर्यावरण संरक्षण की ओर खींचा है। यहां रहने वाले सुनील कुमार ने आम के एक पेड़ को अपनी दुल्हन की तरह मानकर एक अनूठी मिसाल पेश की है। उनका कहना है कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से अपने आम के पेड़ को दुल्हन जैसा सम्मान देते आ रहे हैं। उनका यह अनोखा विचार केवल भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पेड़ों को बचाने और आम लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करने का संदेश छिपा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुनील कुमार का जन्म वर्ष 1990 में हुआ था। वह पंजाब के लुधियाना जिले में फोकल पॉइंट, चंडीगढ़ रोड, सेक्टर-39 क्षेत्र में रहते हैं। उनके पिता का नाम शंकर दयाल बताया गया है। सुनील कुमार ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन पर्यावरण को लेकर उनकी सोच और संदेश बेहद अलग है। वह मसाला और मिर्ची बेचने का काम करते हैं तथा अपनी रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका अपना पारिवारिक जीवन है, पत्नी और बच्चे भी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने आम के पेड़ को अपने जीवन में एक विशेष स्थान दिया है।
सुनील कुमार का कहना है कि दुनिया में लोग कोर्ट मैरिज करते हैं या पारंपरिक तरीके से शादी करते हैं, तो किसी दुल्हन के साथ अपना जीवन जोड़ते हैं। लेकिन उन्होंने आम के पेड़ को दुल्हन की तरह सम्मान देने का फैसला किया। उनके अनुसार, जिस तरह एक परिवार में दुल्हन का सम्मान और देखभाल की जाती है, उसी तरह पेड़ों की भी देखभाल होनी चाहिए। पेड़ केवल लकड़ी या फल देने वाली वस्तु नहीं हैं, बल्कि वे जीवन का आधार हैं। इसलिए उन्हें काटने के बजाय सहेजने और परिवार के सदस्य की तरह रखने की जरूरत है।
सुनील का मानना है कि हर इंसान की एक आम दुनिया होती है और आम जनता के जीवन में आम के पेड़ का भी विशेष महत्व होना चाहिए। वह लोगों से अपील करते हैं कि जब भी कोई पौधा लगाने की बात आए, तो आम का पेड़ जरूर लगाएं। उनका कहना है कि हर घर में एक आम का पेड़ होना चाहिए, जिसे परिवार के लोग अपने सदस्य की तरह पालें और उसकी देखभाल करें। उनके इस विचार का उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना और पेड़ों के प्रति भावनात्मक लगाव पैदा करना है।
सुनील कुमार समाज की बदलती जीवनशैली पर भी अपनी चिंता जाहिर करते हैं। उनका कहना है कि आज लोग अपने पारिवारिक जीवन, रिश्तेदारों और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो गए हैं कि प्रकृति के साथ उनका जुड़ाव कम होता जा रहा है। लोग पेड़ों के पास बैठना, उनकी देखभाल करना और उनके साथ समय बिताना भूलते जा रहे हैं। उनका मानना है कि इंसान को अपने परिवार के साथ-साथ पेड़-पौधों के लिए भी समय निकालना चाहिए।
वह लोगों को एक भावनात्मक उदाहरण देते हुए कहते हैं कि जब किसी इंसान की मृत्यु होती है, तो उसे अंतिम विदाई देने के लिए चार लोग कंधा देते हैं। वे भी आम इंसान ही होते हैं। ऐसे में आम आदमी को यह समझना चाहिए कि प्रकृति और पेड़-पौधे उसके जीवन के कितने बड़े साथी हैं। सुनील के अनुसार, इंसान को अपने जीवन में कम से कम एक आम का पेड़ जरूर लगाना चाहिए और उसे दुल्हन की तरह प्यार और सम्मान देना चाहिए।
उनका संदेश खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जो बिना जरूरत पेड़ों की कटाई करते हैं या पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। सुनील चाहते हैं कि लोगों की सोच बदले और पेड़ों को केवल इस्तेमाल की वस्तु न समझकर जीवित धरोहर के रूप में देखा जाए। वह अपने अनोखे अंदाज से समाज को यह समझाना चाहते हैं कि जिस तरह लोग अपने रिश्तों को संभालकर रखते हैं, उसी तरह पेड़ों की भी रक्षा करनी चाहिए।
सुनील कुमार की यह पहल भले ही आम लोगों के लिए अनोखी और चौंकाने वाली हो, लेकिन इसके पीछे उनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाना है। उनका कहना है कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में एक आम का पेड़ लगाए और उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाली पीढ़ियों को भी हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण मिल सकता है। उनका संदेश साफ है कि पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि उसे बड़ा होने तक अपने परिवार के सदस्य की तरह संभालना भी जरूरी है।
