-5.8 C
Munich
Saturday, January 24, 2026

ट्रंप के कारनामों का दिखेगा असर? भविष्य में अमेरिकी नेताओं के लिए रिश्ते सुधारना हो सकता है मुश्किल

Must read

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में दोस्तों के बाद दुश्मनों जैसा बर्ताव किया। ट्रंप ने कनाडा को अमेरिकी राज्य बनाने और ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कही। ट्रंप के कार्यों का असर भविष्य में अमेरिका और अन्य देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकता है।वॉशिंगटन: राष्ट्रपति पद संभालने के करीब एक महीने बाद जो बाइडेन ने 2021 के म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यूरोप को स्पष्ट संदेश दिया था कि अमेरिका वापस आ गया है। उन्होंने कहा था, “ट्रांसअटलांटिक गठबंधन भी वापस आ गया है।” यह बयान बार-बार दोहराया गया, क्योंकि बाइडेन अपने पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को एक असामान्य विचलन के रूप में पेश करना चाहते थे। लेकिन, 5 साल बाद, बाइडेन के ये आश्वासन धरे के धरे रह गए।
ट्रंप ने दुश्मनों की तरह दोस्तों को धमकाया
सत्ता बदली और फिर ट्रंप का दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ। ट्रंप ने यूरोप के साथ सात दशकों से चले आ रहे गठबंधनों को नजरअंदाज कर दिया है। वो गठबंधन जिन्होंने जर्मनी के एकीकरण और सोवियत संघ के पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ट्रंप ने सहयोगी नेताओं को धमकाया, ऐसी मांगें रखीं और आरोप लगाए जो आमतौर पर दुश्मनों के खिलाफ होते हैं। इससे उन स्थिर संबंधों को गहरा झटका लगा है जो दशकों से कायम थे, और अब यूरोपीय देश अमेरिकी नेतृत्व के बिना अपना रास्ता खुद तलाशने को मजबूर हो गए हैं।NATO को ट्रंप ने दिया झटका
इसका सबसे बड़ा उदाहरण ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकी थी। उन्होंने डेनमार्क से ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंपने की मांग की, इतना ही कब्जा करने की धमकी तक दे दी। यह एक ऐसा कदम है जो NATO को तोड़ सकता है। उन्होंने निजी मैसेज शेयर किए जो दिखाते थे कि यूरोपीय नेता उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे थे। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी झंडा लगी तस्वीरें पोस्ट की हैं। उन्होंने दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा कि यूरोप सही दिशा में नहीं जा रहा और कभी-कभी तानाशाह की जरूरत पड़ती है।
दुनिया में अमेरिका की अनिश्चित स्थिति
ट्रंप ने अब ग्रीनलैंड को लेकर भले ही रुख नरम कर लिया है लेकिन लेकिन इस घटना ने अमेरिका की वैश्विक स्थिति को गहराई से अनिश्चित बना दिया है। NATO के नेता पहले से ही ट्रंप की धमकियों का जवाब अमेरिका-मुक्त रणनीतियों से दे रहे थे। अब ऐसे में इससे अगले राष्ट्रपति चाहे डेमोक्रेट हो या रिपब्लिकन दोनों के लिए दूसरे देशों से उस स्तर पर रिश्ते बहाल करना आसान नहीं होने वाला है।
चीजें पहले जैसी नहीं होंगी
जॉन फाइनर जो बाइडेन के पूर्व डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर और अब सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के सीनियर फेलो हैं ने कहा, “कुछ हद तक चीजें बेहतर हो सकती हैं, लेकिन वो पहले जैसी कभी नहीं होंगी। समझदार देश अब महसूस करेंगे कि अमेरिका पर भरोसा सिर्फ 4 साल के अंतराल में ही किया जा सकता है, अगर भरोसा किया गया तो।”

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Latest article