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Thursday, February 12, 2026

चारधाम रेल परियोजना को लेकर आ गया बड़ा अपडेट, जानें कब खत्म होगा बस-टैक्सी का झंझट

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चारधाम यात्रा पर जाने का सपना तो हर किसी का होता है। लेकिन दुर्गम रास्‍ते और बस-टैक्सी के झंझट की वजह से कई लोग पीछे हट जाते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस रेल प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद लोग सीधे ट्रेन से कर्णप्रयाग तक पहुंच सकेंगे।जल्‍द ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा आसान होने वाली है। श्रद्धालुओं को लंबा और थकाने वाला बस-टैक्सी सफर नहीं करना पड़ेगा। बुजुर्ग भी आराम से चारधाम यात्रा पर जाने की तैयारी कर सकते हैं। भारतीय रेलवे ने इसका पूरा ब्‍लू प्रिंट तैयार कर लिया है। सरकार ने इसे लेकर बुधवार को लोकसभा में बड़ा अपडेट दिया है।रेल मंत्री ने क्या बताया?
सरकार ने बताया कि चारधाम तक रेल संपर्क के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नामक एक नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी गई है तथा गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक रेल संपर्क के विस्तार के लिए सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बीजेपी सांसद अनिल बलूनी और अजय भट्ट के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

40384 करोड़ रुपये होंगे खर्च
मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में 40,384 करोड़ रुपये की लागत वाली 216 किलोमीटर की कुल लंबाई की तीन नई लाइन को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 16 किलोमीटर हिस्सा चालू हो गया है और मार्च 2025 तक 19,898 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है। उन्होंने कहा, ”चारधाम को रेल संपर्क प्रदान करने के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई रेल लाइन परियोजना (125 किमी) को मंजूरी दे दी गई है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक रेल संपर्क को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। हालांकि, परियोजना का मार्ग हिमालय के मुख्य मध्य भाग के निकट स्थित है, जो भूकंप के दृष्टिकोण से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है।

क्या होगा रूट?
इस रेल परियोजना का मार्ग उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरता है तथा देवप्रयाग और कर्णप्रयाग के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को ऋषिकेश और राष्ट्रीय राजधानी को रेल संपर्क के माध्यम से जोड़ेगा।

अब तक कितना काम हुआ?
रेल परियोजना का अधिकांश मार्ग सुरंगों से होकर गुजरता है। इस परियोजना में 104 किलोमीटर लंबाई की 16 मुख्य सुरंगों और लगभग 98 किलोमीटर लंबाई की 12 ‘एस्केप’ (आपातकालीन उपयोग में लायी जा सकने वाली) सुरंगों का निर्माण शामिल है।
अब तक 99 किलोमीटर लंबाई की मुख्य सुरंगें और 94 किलोमीटर से अधिक लंबाई की 9 ‘एस्केप’ सुरंगें पूरी हो चुकी हैं।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई रेल लाइन परियोजना में 104 किलोमीटर लंबाई की 16 मुख्य सुरंगें और लगभग 98 किलोमीटर लंबाई की 12 ‘एस्केप’ सुरंगों का निर्माण शामिल है।
अब तक 99 किलोमीटर लंबाई की मुख्य सुरंगें और 94 किलोमीटर से अधिक लंबाई की 9 एस्केप सुरंगें पूरी हो चुकी हैं।
बता दें कि इस रेल लाइन से न केवल चारधाम जाने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी, बल्कि उत्‍तराखंड के तमाम शहरों की कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट में से एक है, इसि‍लए तेजी से काम चल रहा है।

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