प्रयागराज।
जनपद प्रयागराज के कटहुला गौसपुर गांव हरिहरा से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। गांव निवासी चंद्रशेखर आजाद और उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और थाना स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी पूरी पारिवारिक जमीन अलग-अलग तरीके से निरस्त कर दी गई। कहीं जमीन को तलब की श्रेणी में डाल दिया गया, कहीं कब्रिस्तान दर्ज कर दिया गया, तो कहीं नाम काटकर दूसरे लोगों के नाम चढ़ा दिए गए।
पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक क्षेत्र चायल तहसील में था, तब तक सभी जमीनों पर उनका नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज था। लेकिन तहसील बदलकर इलाहाबाद (प्रयागराज) किए जाने के बाद अचानक सभी अभिलेखों से उनका नाम हटा दिया गया। बिना किसी नोटिस और सुनवाई के यह कार्रवाई की गई, जिससे पूरा परिवार भूमिहीन हो गया।
परिवार का आरोप है कि आज उनकी हालत यह है कि कोई किराए के मकान में रह रहा है, कोई रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए है। उनके पास न घर बचा है और न खेती योग्य जमीन। पीड़ितों ने सवाल उठाया है कि क्या वे देश के नागरिक नहीं हैं? क्या गरीब होने की यही सजा है? क्या वोट के समय ही सरकार को गरीब याद आते हैं?
पीड़ितों का यह भी कहना है कि यह केवल उनके परिवार का मामला नहीं है, बल्कि कटा हुआ गौसपुर के कई गरीब परिवारों के साथ इसी तरह जमीन के कागजात गायब किए गए हैं। एक बार गांव में राजस्व शिविर लगा था, जहां कागजात दिखाने पर बताया गया था कि जमीन रिकॉर्ड में मौजूद है और कुछ हिस्सा रेलवे में भी दर्ज है। लेकिन बाद में तहसील और कचहरी के चक्कर लगवाकर थका दिया गया।
परिवार का आरोप है कि जब भी “पूरी नकल” या “परिवार रजिस्टर” की मांग की जाती है, तो बताया जाता है कि रिकॉर्ड गायब है। यहां तक कि गांव का परिवार रजिस्टर और खतौनी के पुराने दस्तावेज भी लापता कर दिए गए हैं।
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार व अन्य अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और सभी गरीब परिवारों की जमीन उन्हें वापस दिलाई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी न्याय नहीं मिला तो वे मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
कटहुला गौसपुर में गरीब परिवारों की जमीन हड़पने का आरोप लेखपाल-कानूनगो-तहसीलदार पर मिलीभगत का दावा
