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Thursday, March 5, 2026

बालोतरा की रिफाइनरी मेगा कंपनी में बड़ा हादसा, पांचवीं मंजिल से गिरा मजदूर; एक महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा

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राजस्थान के बालोतरा स्थित एक रिफाइनरी मेगा कंपनी में काम करने वाले बिहार के कटिहार जिले के मजदूर राजा कुमार मंडल (35) के साथ हुए हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अहमदाबाद थाना क्षेत्र के निवासी राजा कुमार मंडल करीब तीन महीने से इस कंपनी में मजदूरी कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि करीब एक महीने पहले काम के दौरान वह कंपनी की पांचवीं मंजिल से नीचे गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद से उनकी हालत ऐसी हो गई है कि वह ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रहे हैं। घायल मजदूर का कहना है कि इस दुर्घटना के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है और अब परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

पीड़ित मजदूर का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद कंपनी के मालिक टिंकू मंडल और ठेकेदार हिमांशु राय ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि इलाज में जितना भी खर्च आएगा, वह कंपनी की ओर से दिया जाएगा और उचित मुआवजा भी मिलेगा। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली है।

राजा कुमार मंडल का कहना है कि फिलहाल उन्हें केवल 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं, जो उनके परिवार के खर्च के लिए बेहद कम हैं। उनका कहना है कि इस रकम में न तो दवा का खर्च पूरा हो पा रहा है और न ही घर का किराया और बच्चों का पालन-पोषण संभव हो पा रहा है। चोट के कारण वह काम करने की स्थिति में भी नहीं हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक बिगड़ती जा रही है।

मजदूर ने बताया कि उनके ऊपर पत्नी और बच्चों की जिम्मेदारी है। ऐसे में 1500 रुपये में परिवार चलाना लगभग असंभव है। उनका कहना है कि हादसे के समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन अब कंपनी और ठेकेदार उनकी सुध लेने को तैयार नहीं हैं।

यह घटना प्रवासी मजदूरों की स्थिति और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की गंभीरता को भी उजागर करती है। श्रमिकों का कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और दुर्घटना के बाद उचित मुआवजे की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

फिलहाल घायल मजदूर और उनका परिवार न्याय और उचित मुआवजे की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि अगर उन्हें सही मदद नहीं मिली तो उनका परिवार आर्थिक तंगी में और गहरे संकट में फंस सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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