भास्कर न्यूज | रजौन (बांका)
भवानीपुर-कठौन पंचायत के नवादा गोपालपुर गांव में छेड़खानी का विरोध करना एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। दबंगों द्वारा ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से किए गए हमले में बुजुर्ग धनंजय पंडित की मौत हो गई, जबकि तीन युवक गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक के साथ-साथ आक्रोश का माहौल है, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और आरोपी खुलेआम धमकी दे रहे हैं।
पीड़िता नूतन देवी, पत्नी वीरेंद्र पंडित, ने बताया कि 23 जनवरी की रात वह शौच के लिए बहियार गई थीं। लौटने पर देखा कि गांव का ही करण पासवान उनके घर में घुसा हुआ था। आरोप है कि उसने जबरदस्ती पकड़कर कमरे के अंदर खींचने की कोशिश की और शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया। शोर मचाने पर पास में चल रहे सरस्वती पूजा के कीर्तन में शामिल परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आरोपी को पकड़कर बाहर निकाला। इस दौरान हल्की झड़प भी हुई, जिसके बाद आरोपी के स्वजन उसे अपने साथ ले गए।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि इसके बाद उल्टा उन्हें ही फंसाने की साजिश रची गई। आरोपी पक्ष द्वारा एससी/एसटी थाना में आवेदन दिया गया। 27 जनवरी को पुलिस गांव पहुंची और जांच के बाद लौट गई। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस के जाते ही आरोपी पक्ष के करीब 20 लोग लाठी-डंडों से लैस होकर गांव पहुंचे और अचानक ईंट-पत्थर चलाने लगे। हल्ला सुनकर धनंजय पंडित, अभिकांत पंडित, विपुल पंडित और सुधाकर पंडित बचाव में पहुंचे तो उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया।
हमले में चारों गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। सूचना पर 112 पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक सभी आरोपी फरार हो चुके थे। घायलों को पहले रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर भागलपुर के मायागंज अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान बुधवार रात बुजुर्ग धनंजय पंडित की मौत हो गई। सिर और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें पाई गई हैं।
गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए। पीड़िता ने 20 लोगों के खिलाफ हत्या, मारपीट और छेड़खानी के प्रयास का आरोप लगाते हुए आवेदन दिया है। थाना अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
हालांकि पीड़ित परिवार का आरोप है कि अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आरोपी खुलेआम गांव और आसपास घूम रहे हैं और परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें इंसाफ मिलना मुश्किल हो जाएगा।
अब पीड़ित परिवार मीडिया और प्रशासन से गुहार लगा रहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जाए, दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। परिवार का कहना है कि मीडिया के माध्यम से ही शायद उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंच सके और उन्हें इंसाफ मिल सके।
