करीब 55 वर्षीय गज्जन सिंह अविवाहित हैं और लंबे समय से अकेले ही अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनका अपना कोई स्थायी घर नहीं है, इसलिए जहां उन्हें मजदूरी मिलती है, वहीं रहकर गुजारा करते हैं।
गज्जन सिंह स्वाभिमानी व्यक्ति हैं और कभी किसी से भीख नहीं मांगते। अपनी मेहनत की कमाई से ही उन्होंने हमेशा अपना जीवन चलाया। लेकिन पिछले दो से तीन महीनों से उनकी स्थिति पूरी तरह बदल गई है। मजदूरी के दौरान उनके हाथ और पैर में गंभीर चोट लग गई, जिससे वे चलने फिरने और काम करने में असमर्थ हो गए हैं।
इलाज के लिए डॉक्टरों ने उनके हाथ के फ्रैक्चर का खर्च लगभग एक लाख रुपये बताया है, जो उनके लिए जुटा पाना असंभव है। आर्थिक तंगी के चलते उनका इलाज अधूरा पड़ा हुआ है और अब उनके सामने रोजमर्रा के खर्चों का संकट भी खड़ा हो गया है।
गज्जन सिंह की यह स्थिति न केवल उनकी व्यक्तिगत परेशानी को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जरूरत के समय एक मेहनतकश व्यक्ति किस तरह असहाय हो सकता है। उन्होंने सरकार और समाज से अपील की है कि उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि उनका इलाज हो सके और वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गज्जन सिंह जैसे स्वाभिमानी और मेहनती व्यक्ति की मदद के लिए प्रशासन और समाज दोनों को आगे आना चाहिए, ताकि उनकी जिंदगी फिर से पटरी पर लौट सके।
