नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के हर्ष विहार थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपने ससुराल पक्ष पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ईशु ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वह अपने तीन वर्षीय बेटे के साथ ससुराल गई थी, जहां उस पर कोर्ट में चल रहे मुकदमे को वापस लेने का दबाव बनाया गया।
पीड़िता का आरोप है कि जब उसने केस वापस लेने से इनकार किया तो उसके ससुर, पति और सास ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि ससुर ने उस पर पेट्रोल डाला, जबकि पति और सास ने उसे पकड़ रखा था ताकि उसे आग लगाई जा सके। महिला का कहना है कि वह किसी तरह अपनी जान बचाकर घर से बाहर निकली और तत्काल 112 पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
हालांकि, इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब मेडिकल रिपोर्ट को लेकर पीड़िता के परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए। परिजनों का आरोप है कि मेडिकल रिपोर्ट में पेट्रोल डाले जाने या उससे संबंधित किसी रासायनिक तत्व की पुष्टि नहीं की गई है। उनका कहना है कि घटना के समय पहने गए कपड़े अब भी उनके पास सुरक्षित हैं, लेकिन उनकी वैज्ञानिक जांच नहीं कराई गई।
परिजनों का यह भी आरोप है कि शुरुआत में पुलिस अधिकारियों ने पेट्रोल डाले जाने की बात स्वीकार की थी, लेकिन बाद में रिपोर्ट में उसका कोई उल्लेख नहीं किया गया। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिवार का कहना है कि यदि कपड़ों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पेट्रोल डाले जाने के आरोप और मेडिकल रिपोर्ट के बीच सामने आए इस विरोधाभास को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। घटना की वास्तविकता क्या है, इसका स्पष्ट जवाब जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
