मधेपुरा। बिहारीगंज थाना क्षेत्र के रहुआ वार्ड नंबर 5 में जमीन विवाद को लेकर एक बार फिर तनाव और दहशत का मामला सामने आया है। पीड़ित मनोज मेहता का आरोप है कि पुराने जमीन विवाद को लेकर करीब 6 से 7 लोग हथियारों से लैस होकर उनके घर पहुंचे और उनके साथ गाली-गलौज व मारपीट की कोशिश की। पीड़ित का दावा है कि हमलावरों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग भी की। घटना के बाद से पूरा परिवार भय के माहौल में रहने को मजबूर है।
मनोज मेहता, उम्र करीब 46 वर्ष, निवासी रहुआ, वार्ड नंबर 5, थाना बिहारीगंज, जिला मधेपुरा ने न्यायालय में दिए सनहा आवेदन में कई लोगों को विपक्षी बनाया है। आवेदन में संजय मेहता, शांति देवी, पिंटू मेहता, मीना देवी, विजय मेहता, बबलू मेहता, गीता देवी, सर्वेश मेहता, आशीष कुमार, सुजीत कुमार, मौशन कुमार और दिवाकर कुमार समेत अन्य लोगों के नाम दर्ज हैं।
पीड़ित के अनुसार विपक्षी पक्ष के कई लोग एक ही परिवार से जुड़े हैं और उनके बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। मनोज मेहता का आरोप है कि विपक्षी पक्ष के लोग अक्सर किसी न किसी बहाने से उनके साथ गाली-गलौज, लड़ाई-झगड़ा और मारपीट करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी जाती है।
मनोज का कहना है कि विवाद को समाप्त कराने के लिए उन्होंने कई बार गांव के गणमान्य लोगों और स्थानीय लोगों को बुलाकर पंचायत कराने का प्रयास किया। आरोप है कि पंचायत के दौरान भी विपक्षी पक्ष के एक व्यक्ति ने कथित रूप से बेहद गंभीर धमकी दी। पीड़ित के मुताबिक पंचायत में यह कहा गया कि मामला खून-खराबे के बिना खत्म नहीं होगा और किसी को जान से मरवाकर गायब कर देने जैसी धमकी भी दी गई। इसके बाद विपक्षी पक्ष पंचायत की बात मानने के बजाय वहां से चला गया।
पीड़ित ने अपने आवेदन में बिहारीगंज थाना कांड संख्या 168/18 का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि जमीन विवाद को लेकर वर्ष 2018 से कानूनी लड़ाई चल रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2018 में भी करीब 10 से 15 लोगों ने उनके घर में आग लगा दी थी, जिसका मामला भी न्यायालय और पुलिस स्तर पर चल रहा है। पुराने विवाद के बावजूद परिवार को लगातार धमकियों और विवाद का सामना करना पड़ रहा है।
मनोज मेहता के मुताबिक थाने में पूर्व में लिखित शिकायत दिए जाने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर विवाद सुलझाने का प्रयास किया था। लेकिन उनका आरोप है कि थाने से लौटने के बाद विपक्षी पक्ष फिर से झगड़े और मारपीट पर उतारू हो जाता था। पीड़ित का कहना है कि उन्हें बार-बार धमकी दी जाती रही कि उनके द्वारा दर्ज कराया गया केस वापस ले लें, वरना इसका परिणाम बेहद गंभीर होगा।
पीड़ित के अनुसार 13 अगस्त 2026 को स्थिति अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गई। उनका आरोप है कि रात करीब 10:37 बजे जब वह अपने दरवाजे पर बैठे थे, ओर दरवाजे तोड़ने लगा दरवाजा नहीं टूटने पर फायरिंग चालू कर दी किसे तरह आस पास लोगो की सहायता से जान बच गई
मनोज मेहता का दावा है कि इसके बाद हमलावरों ने उनके साथ मारपीट करने का प्रयास किया और उन्हें तथा उनके परिवार के सदस्यों को किसी अप्रिय घटना की धमकी दी। पीड़ित के मुताबिक कुछ लोगों ने हथियार निकालकर फायरिंग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के दौरान उनके घर और परिवार में दहशत फैल गई और सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए परेशान हो गए।
पीड़ित ने इस मामले में मंटू मेहता नाम के पड़ोसी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुराना जमीन विवाद पहले से चल रहा है और हाल की घटना में भी मंटू महतो की भूमिका होने का उन्हें संदेह है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मनोज मेहता का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस से मदद की उम्मीद की, लेकिन उनके मुताबिक पुलिस करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंची। इस देरी को लेकर पीड़ित परिवार ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुलिस नहीं पहुंची तो भविष्य में कोई बड़ी घटना हो सकती है।
पीड़ित ने बताया कि वह मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद, पुराने मुकदमे और लगातार मिल रही कथित धमकियों ने परिवार की परेशानी बढ़ा दी है। उनका कहना है कि अब वह और उनका परिवार डर के साए में जी रहा है और उन्हें आशंका है कि आरोपी दोबारा हमला कर सकते हैं।
पीड़ित मनोज मेहता ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, घटना में शामिल लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने, फायरिंग के आरोप की जांच कराने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जमीन विवाद का फैसला कानून के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन किसी को भी कानून हाथ में लेकर परिवार को डराने या जान से मारने की धमकी देने का अधिकार नहीं है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही पुष्टि हो सकेगी। पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट होगा कि घटना के समय कितने लोग मौके पर मौजूद थे, फायरिंग हुई या नहीं और कथित हमले में किसकी भूमिका रही। पीड़ित परिवार की मांग है कि जांच में किसी प्रकार की देरी न हो और समय रहते सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि विवाद किसी बड़ी घटना में तब्दील न हो।
