30.6 C
Munich
Wednesday, August 12, 2026

जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप साबित, सरकारी आवास पर भारी मात्रा में मिले थे जले और अधजले नोट

Must read

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना है। 14-15 मार्च 2025 की रात दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगी थी। मौके पर पहुंचे पुलिस और दमकल अधिकारियों को वहां बड़ी संख्या में 500 रुपये के जले, अधजले और बिखरे हुए नोट मिले थे।
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना है। समिति ने कहा है कि उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में 500 रुपये के जले और अधजले नोट मिले थे, लेकिन इन नोटों के स्रोत या मालिकाना हक को लेकर जस्टिस वर्मा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 और 15 मार्च 2025 की रात दिल्ली के 30 तुगलक क्रिसेंट स्थित सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगी थी। आग बुझाने पहुंचे दिल्ली पुलिस और दमकल के अधिकारियों ने वहां बड़ी संख्या में जले, अधजले, गीले और बिखरे हुए 500 रुपये के नोट देखे। कई अधिकारियों के बयान और फोटो-वीडियो रिकॉर्ड भी इसकी पुष्टि करते हैं।
कितनी नकदी थी, यह साफ नहीं हो सका
समिति ने कहा कि मौके से नोटों को जब्त नहीं किया गया, न उनकी गिनती हुई और न ही उनकी पूरी सूची बनाई गई। इसी वजह से रिपोर्ट में नकदी की सही रकम बताना संभव नहीं है। लेकिन समिति के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि वहां कम नोट थे। उपलब्ध सबूतों से साफ है कि स्टोर रूम में 500 रुपये के नोट बड़ी संख्या में थे।

पहला आरोप- नकदी का कोई संतोषजनक जवाब नहीं
पहले आरोप में कहा गया था कि न्यायमूर्ति वर्मा के नियंत्रण वाले सरकारी परिसर में बड़ी मात्रा में ऐसी नकदी मिली, जिसका कोई साफ स्रोत या मालिकाना हक सामने नहीं आया। समिति ने इस आरोप को साबित माना। रिपोर्ट में कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा नोटों के मिलने, उनके स्रोत और उनके मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

दूसरा आरोप- सबूत सुरक्षित नहीं रखे गए
दूसरे आरोप में आग बुझने के बाद घटनास्थल और वहां मौजूद सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं रखने की बात थी। समिति ने यह आरोप भी साबित माना। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों की जांच और जगह को सील करने से पहले स्टोर रूम की स्थिति में बदलाव हुआ और बाद में वहां मौजूद नोट भी नहीं मिले। समिति ने कहा कि इस आरोप को साबित करने के लिए यह जरूरी नहीं था कि न्यायमूर्ति वर्मा ने खुद जाकर नोट हटाए हों। उनके नियंत्रण वाले परिसर में सबूत सुरक्षित नहीं रखे गए और इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए।

तीसरा आरोप- जवाब टालमटोल वाला और अधूरा बताया
तीसरे आरोप में न्यायमूर्ति वर्मा के अलग-अलग स्पष्टीकरण को लेकर सवाल उठाए गए थे। समिति ने कहा कि उनके जवाब में वह साफ-साफ जानकारी नहीं थी जिसकी इस मामले में एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से उम्मीद की जाती है। समिति के मुताबिक, 22 मार्च 2025 के जवाब में न्यायमूर्ति वर्मा ने नकदी के बारे में जानकारी होने से इनकार किया था। बाद में उनके रुख में बदलाव आया और उन्होंने घटनास्थल की जब्ती, नकदी की गिनती और बाद में हुई सफाई जैसे मुद्दे उठाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा ने स्टाफ की भूमिका, नकदी को वहां रखे जाने, नकदी हटाए जाने या किसी साजिश जैसी बातों की ओर इशारा किया, लेकिन इन दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत या गवाह पेश नहीं किया गया।

समिति ने अंत में कहा कि उनका स्पष्टीकरण टालमटोल वाला, अधूरा और अपने असर में गुमराह करने वाला था। इसके आधार पर तीसरे आरोप को भी साबित माना गया।

समिति का अंतिम निष्कर्ष
रिपोर्ट के सबसे अहम हिस्से में समिति ने साफ कहा है कि आरोप नंबर एक, दो और तीन- तीनों साबित होते हैं। समिति ने कहा कि सरकारी आवास के स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में 500 रुपये के नोट मिले, उनका संतोषजनक स्रोत नहीं बताया गया, महत्वपूर्ण सबूत सुरक्षित नहीं रखे गए और बाद में नकदी के गायब होने का भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। समिति ने अपनी रिपोर्ट और जांच से जुड़े दस्तावेज आगे की कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे जाने की बात कही है।

समिति ने कहा कि सरकारी परिसर के स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में करेंसी मिली थी। जस्टिस यशवंत वर्मा उस परिसर के प्रभावी नियंत्रण में थे। नोटों के मालिक कौन थे या उनका स्रोत क्या था, इसका संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। समिति ने साफ किया है कि वह यह फैसला नहीं दे रही कि नोट सीधे तौर पर व्यक्तिगत रूप से जस्टिस वर्मा के थे। लेकिन उनके परिसर में इतनी बड़ी रकम मिलना, उस जगह पर उनका नियंत्रण होना और रकम के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलना, इन परिस्थितियों में आरोप साबित होता है।

जस्टिस वर्मा की गैर मौजूदगी, घर तक दूसरे लोगों की पहुंच और नोट उनके नहीं होने की दलील समिति को स्वीकार नहीं हुई।

नोटों को किसी ने साजिश के तहत वहां रख दिया था, इस दलील का भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला। समिति के मुताबिक, न किसी व्यक्ति की पहचान हुई, न यह साबित हुआ कि वह व्यक्ति वहां कब आया और न यह बताया गया कि इतनी बड़ी रकम बिना किसी की नजर में आए वहां कैसे पहुंचाई गई।

सबूत सुरक्षित नहीं रखना और सबूत की स्थिति बदलना, आरोप साबित
समिति ने माना कि स्टोर रूम में मौजूद अहम सबूतों को सुरक्षित नहीं रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कमरे को कानूनी तरीके से सील करने और जांच करने से पहले वहां की स्थिति में बदलाव हुआ। इसके बाद वहां मौजूद सामग्री का पता नहीं चला। हालांकि, समिति ने यह सीधे तौर पर नहीं कहा कि जस्टिस वर्मा ने खुद नोट हटाए। आरोप इस आधार पर साबित माना गया कि जरूरी सबूत सुरक्षित नहीं रखे गए और घटनास्थल की स्थिति बदल गई।

समिति ने कहा कि जस्टिस वर्मा का बचाव उन सबसे अहम सवालों का जवाब नहीं देता जिनका संबंध स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में नोट मिलने से था। रिपोर्ट के अनुसार, उनके जवाब में यह नहीं बताया गया कि उन्होंने घटना के बाद क्या कदम उठाए, स्टाफ या घर के लोगों से क्या पूछताछ की, उनसे क्या जवाब मिला और घटनास्थल को सुरक्षित रखने के लिए क्या किया गया। समिति ने यह भी कहा कि शुरुआत में एक व्यापक इनकार किया गया, लेकिन बाद में अलग-अलग संभावनाएं बताई गईं। इन संभावनाओं के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया। इसी वजह से समिति ने उनके जवाबों को अधूरा और प्रभाव में गुमराह करने वाला माना।

फायर और पुलिस अधिकारियों पर भी समिति सख्त
रिपोर्ट में समिति ने फायर और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। समिति ने कहा कि मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस और फायर अधिकारियों से कानून के मुताबिक अपनी जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद थी। लेकिन करेंसी को जब्त करने, उसकी सूची बनाने और उसे सुरक्षित रखने में अधिकारियों की नाकामी गंभीर चूक थी। समिति ने पहले ही माना है कि मौके पर हुई शुरुआती कार्रवाई में सबूतों को सुरक्षित रखने के मामले में कमी रही।

यानी रिपोर्ट का बड़ा निष्कर्ष यह है कि समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ तीनों आरोपों को साबित माना है, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया है कि उसने यह प्रत्यक्ष निष्कर्ष नहीं दिया कि बरामद नोट व्यक्तिगत रूप से उन्हीं के थे या उन्होंने खुद नोट हटाए थे।

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Latest article