सीतापुर। सदरपुर थाना क्षेत्र के बिलोली नानकारी गांव में आबादी की जमीन और मकान के सहन को लेकर विवाद सामने आया है। गांव की रहने वाली पीड़िता राजरानी पत्नी स्वर्गीय रामचंद्र ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और प्रशासनिक अधिकारियों को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि दबंग प्रभाव रखने वाले ग्राम प्रधान नीलू ने उसके मकान के सामने स्थित सहन की जमीन को कथित रूप से अपनी जमीन बताकर दूसरे व्यक्ति रामनरेश के हाथ करीब 3 लाख रुपये में बेच दिया। पीड़िता का कहना है कि जमीन पर कब्जे के बाद वहां प्लास्टर मशीन और अन्य सामान रखकर रास्ते तथा सहन के उपयोग में बाधा उत्पन्न की जा रही है।
पीड़िता के अनुसार गांव में उसका पुश्तैनी मकान बना हुआ है और मकान के सामने वर्षों से सहन की जमीन का उपयोग परिवार द्वारा किया जाता रहा है। आरोप है कि इसी जमीन को लेकर ग्राम प्रधान और दूसरे पक्ष ने दबंगई दिखाते हुए जमीन को अपना बताना शुरू कर दिया। शिकायत में कहा गया है कि बाद में कथित रूप से रामनरेश को जमीन बेच दी गई और रामनरेश द्वारा सहन की जमीन पर निर्माण सामग्री तथा मशीनें रखकर कब्जे की स्थिति बना दी गई।
राजरानी का आरोप है कि जब उसने इस कार्रवाई का विरोध किया तो रामनरेश और उसके परिजनों ने उसके साथ कई बार मारपीट की। पीड़िता ने शिकायत में रामनरेश तथा अन्य आरोपियों के नाम का उल्लेख करते हुए कहा है कि उसे गाली-गलौज करने के साथ डराया-धमकाया गया। पीड़िता के अनुसार एक घटना में शाम करीब 5 बजे उसे धमकी दी गई कि यदि वह लगातार शिकायत करती रही तो उसे जान से मार दिया जाएगा। आवेदन में घटना की तारीख दर्ज है, हालांकि उपलब्ध प्रति में तारीख स्पष्ट रूप से पढ़ने योग्य नहीं है।
पीड़िता का कहना है कि उसने मामले को लेकर तहसील दिवस में भी शिकायत की और संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन उसके अनुसार अब तक न तो कथित अवैध कब्जा हटाया गया और न ही विपक्षियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई। महिला का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जमीन पर कब्जे और विवाद की स्थिति बनी हुई है।
शिकायतकर्ता ने खुद को विधवा, गरीब और असहाय महिला बताते हुए कहा है कि उसके सामने अपनी जमीन और मकान के सहन को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। उसका कहना है कि परिवार में सहारा देने वाला कोई मजबूत व्यक्ति नहीं है और इसी वजह से वह लगातार दबाव में है। पीड़िता का दावा है कि विरोध करने पर उसे डराया जाता है और कहा जाता है कि वह जो करना चाहती है कर ले।
पीड़ित पक्ष की ओर से दिए गए दूसरे बयान में सरिता नाम का उल्लेख भी सामने आया है। सरिता ने बताया कि कथित कब्जे को लेकर करीब चार-पांच वर्षों से विवाद चला आ रहा है। उसके अनुसार ग्राम प्रधान नीलू पर आरोप है कि उसने आबादी की जमीन किसी अन्य व्यक्ति को करीब 3 लाख रुपये में बेच दी। सरिता का दावा है कि जमीन के उपयोग और रास्ते को लेकर भी उसे लिखित अधिकार नहीं दिया जा रहा है तथा विरोध करने पर उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की जाती है।
सरिता के अनुसार विवाद बढ़ने पर उसे अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा। उसका कहना है कि वह पहले ही काफी परेशान है और उसके माता-पिता का भी सहारा नहीं है। ऐसे में जमीन और रास्ते से जुड़ा विवाद उसके लिए गंभीर परेशानी बन गया है।
पीड़ित महिला ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की मौके पर जांच कराकर यह स्पष्ट कराया जाए कि विवादित जमीन किसके नाम राजस्व और आबादी अभिलेखों में दर्ज है। साथ ही जमीन की पैमाइश कराकर यदि किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे की जमीन पर कब्जा या अवैध निर्माण किया गया है तो उसे हटाया जाए। महिला ने कथित बिक्री की भी जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता का कहना है कि उसे सबसे ज्यादा चिंता अपने मकान के सामने स्थित सहन और आने-जाने के रास्ते को लेकर है। उसका आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति स्पष्ट नहीं की तो विवाद और बढ़ सकता है। महिला ने मुख्यमंत्री और स्थानीय प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर उसे सुरक्षा तथा न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।
मामले में लगाए गए जमीन बेचने, अवैध कब्जे, मारपीट और धमकी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विवादित भूमि का वास्तविक स्वामित्व और कब्जे की वैधानिक स्थिति राजस्व अभिलेखों, भूमि की पैमाइश और सक्षम न्यायिक अथवा राजस्व प्राधिकारी की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित ग्राम प्रधान और दूसरे पक्ष का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जा सकता है।
पीड़ित परिवार की प्रशासन से मांग है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जांच कराई जाए, जमीन की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान हो सके और महिला को समय रहते न्याय मिल सके।
