एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच ने कहा कि एफडीए की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की पुणे स्थित कैरी एंड फॉरवर्डिंग यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस ले लिया। एफडीए ने बॉम्बे हाई कोर्ट की फटकार के बाद शनिवार को लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लिया है। कोर्ट ने FDA से कहा कि उसने इस मामले में हद पार कर दी और मनमाने तरीके से कार्रवाई की।
एफडीए की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ
एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच ने कहा कि एफडीए की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। एफडीए ने कहा कि वो लाइसेंस रद्द करने का आदेश तत्काल वापस लेगा और कंपनी को नया कारण बताओ नोटिस जारी करेगा। इसके बाद मामले में कारणों सहित नया आदेश पारित किया जाएगा।
सिप्ला फार्मा ने कार्रवाई पर क्या कहा
बताते चलें कि एफडीए ने पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की दवाओं के भंडारण और वितरण सुविधा का दवा बिक्री लाइसेंस 27 अगस्त से रद्द कर दिया था। ये कार्रवाई ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट की पैकेजिंग, स्टोरेज और वापसी से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में की गई थी। सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज ने शुक्रवार शाम कहा था कि उसने इस कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती दी है।
दवा कंपनी के वकील ने कोर्ट को बताई ये बातें
सिप्ला फार्मा की ओर से पेश सीनियर वकील आबाद पोंडा ने शनिवार को बेंच को बताया कि एफडीए ने 26 अगस्त को डिपार्टमेंट के सामने सुनवाई के लिए कंपनी को प्रतिनिधि भेजने का निर्देश ईमेल के जरिए दिया था। उन्होंने कहा कि 26 अगस्त को सार्वजनिक छुट्टी थी। पोंडा ने कहा, ”उस दिन कंपनी का कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं था और उसने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया था। हालांकि, एफडीए ने सुनवाई का मौका दिए बिना उसी दिन आदेश पारित कर दिया।”
हद से आगे जाकर काम कर रहा है एफडीए
एफडीए की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी वकील पी.पी. काकड़े ने कहा कि कानून कंपनी को सुनवाई का अधिकार नहीं देता। इस पर बेंच ने सवाल किया कि विभाग ने दवा कंपनी को ईमेल भेजकर सुनवाई के लिए प्रतिनिधि भेजने को क्यों कहा, वो भी राज्य सरकार द्वारा घोषित सरकारी छुट्टी के दिन। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, ”एफडीए सराहनीय और प्रशंसनीय काम कर रही है, लेकिन अब आप हद से आगे जा रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। आपसे गलती हुई है और अब आपको इस मुद्दे का समाधान करना होगा।”
