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Thursday, October 15, 2026

भारत से रिश्ते सुधारने की कनाडा की कोशिश तेज! PM मोदी और जयशंकर से मिलीं अनीता आनंद

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भारत-कनाडा के रिश्तों को सुधारने की कोशिशों के बीच कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने PM मोदी और एस. जयशंकर से मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने PM मोदी और जयशंकर से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।
व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर भारत-कनाडा के बीच बनी सहमति।
करीब 300 प्रतिनिधियों वाला कनाडाई व्यापार मिशन भारत में कारोबारी अवसर तलाश रहा है।
नई दिल्ली: भारत और कनाडा के रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे भारत-कनाडा संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
PM मोदी से मुलाकात के बाद क्या बोलीं अनीता आनंद?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद अनीता आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारत और कनाडा के पास मिलकर अधिक समृद्ध भविष्य बनाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और व्यापार, निवेश तथा सुरक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसरों पर चर्चा हुई। अनीता आनंद ने यह भी कहा कि दोनों देशों के करीब 80 साल पुराने राजनयिक संबंधों को परिवारों, छात्रों और उद्यमियों की कई पीढ़ियों ने मजबूत बनाया है। इन लोगों ने भारत और कनाडा को करीब लाने में अहम भूमिका निभाई है।
मार्क कार्नी की भारत यात्रा का भी किया जिक्र
कनाडा की विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच हाल के उच्चस्तरीय संपर्कों का भी उल्लेख किया। इनमें कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की इस साल की शुरुआत में हुई भारत यात्रा और फिलहाल चल रहे ‘टीम कनाडा ट्रेड मिशन’ का जिक्र शामिल है। अनीता आनंद ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच फिर से बढ़ रहे संपर्कों से ऐसे अवसर पैदा होंगे, जो लंबे समय तक दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होंगे। उनका कहना है कि भारत और कनाडा के बीच सहयोग बढ़ाने से आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।

जयशंकर के साथ व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा पर चर्चा
अनीता आनंद ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि ठीक एक साल पहले नई दिल्ली में जयशंकर के साथ बैठक के दौरान भारत-कनाडा संबंधों के लिए साझा रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई थी। अब दोबारा भारत आने पर उन्होंने व्यापार वार्ता और ऊर्जा, नवाचार तथा सुरक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों का महत्व इस बात में है कि वे मिलकर क्या हासिल कर सकते हैं।
शिक्षा से लेकर रक्षा तक सहयोग बढ़ाने पर जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अनीता आनंद के साथ बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की। बातचीत में व्यापार, निवेश, शिक्षा, ऊर्जा, रक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल रहे। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों को आगे बढ़ाना और नए अवसर तलाशना रहा। बता दें कि G7 में भी भारत-कनाडा की नई केमिस्ट्री दिखी थी।

PM मोदी और मार्क कार्नी के बीच भी हुई थी बातचीत
अनीता आनंद की भारत यात्रा से एक दिन पहले, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में बन रहे सकारात्मक माहौल को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इस बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर ध्यान देने की बात कही गई। लगातार हो रही ये उच्चस्तरीय बैठकें भारत और कनाडा के रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिशों का हिस्सा हैं।

300 प्रतिनिधियों के साथ भारत आया कनाडा का व्यापार मिशन
भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर बातचीत भी जारी है। दोनों देश इस समझौते की वार्ता पूरी करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका मकसद व्यापार और निवेश के अवसरों का विस्तार करना है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू करीब 300 प्रतिनिधियों के एक दल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह प्रतिनिधिमंडल भारत में विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में कारोबारी अवसर तलाशने आया है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत का एक अहम केंद्र आर्थिक सहयोग और कारोबार को बढ़ावा देना है।

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